रांची : धनबाद-बोकारो क्षेत्र में सुरक्षाबलों की नक्सलियों से हुई भीषण मुठभेड़ में 8 नक्सली मारे गए हैं. राज्य के तीन दिग्गज अफ़सरों, डीजीपी अनुराग गुप्ता, आइजी अभियान, एवी होमकर एवं सीआरपीएफ आइजी साकेत सिंह की प्लानिंग और एक्जिक्यूशन के आगे सीपीआइ माओवादी का सबसे दुर्दांत नक्सली विवेक भी मारा गया. नक्सलियों के मूवमेंट की सूचना मिलने पर डीजीपी अनुराग गुप्ता, आइजी अभियान एवी होमकर और सीआरपीएफ आइजी साकेत सिंह ने एक बेहतरीन प्लान तैयार किया, जिसके तहत नक्सलियों को चारों तरफ से घेर लिया गया ओर सुबह करीब साढ़े पांच बजे पहली बार नक्सलियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें कोबरा के जवानों ने मोर्चा संभाला और एक करोड़ के इनामी समेत आठ को मार गिराया. (नीचे भी पढ़ें)

झारखंड पुलिस के टॉपमोस्ट वांटेड नक्सलियों की लिस्ट में नंबर टू मारा गया. जिस प्रयाग मांझी उर्फ विवेक का ख़ौफ़ था, उसका अंत होना तो तय था, लेकिन इंतज़ार था सही टीम और सही वक्त पर फैसले का. झारखंड के तीन दिग्गज अफ़सर, डीजीपी अनुराग गुप्ता, आइजी अभियान एवी होमकर और सीआरपीएफ आइजी साकेत सिंह की प्लानिंग और एक्जिक्यूशन के आगे सीपीआइ माओवादी का सबसे दुर्दांत नक्सली विवेक भी मारा गया. झारखंड, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ और बंगाल के जंगलों में मौजूद माओवादियों के थोडे बड़े कैंपों में आज सन्नाटा पसरा है. नक्सलियों की नींद पूरी तरह उड़ चुकी है. एक साथ आठ नक्सली, जिनमें सबसे शातिर दिमागवाला प्रयाग मांझी उर्फ विवेक के मारे जाने से झारखंड का एक बड़ा इलाका नक्सल मुक्त हो चुका है. (नीचे भी पढ़ें)

पारसनाथ की पहाड़ियों और बोकारो की लुगू पहाड़ी, जहां दिन के वक्त भी दहशत के मारे बाहरी लोग जाने से घबराते थे, वहां पुलिस और सीआरपीएफ को इतनी ब़ड़ी कामयाबी हासिल हुई है. झारखंड के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता इस कामयाबी के बारे में बता रहे हैं कि कैसे नक्सलियों को उनकी मांद में घुस कर मार गिराया. डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बताया कि लुगू जंगल में भाकपा (माओवादी) विवेक उर्फ प्रयाग मांझी (केंद्रीय कमेटी सदस्य), सहदेव सोरेन (केंद्रीय कमेटी सदस्य) समेत 20 से 25 हथियारबंद माओवादियों के मौजूद होने की सूचना मिली थी. इसके आधार पर 209 कोबरा, बोकारो पुलिस, झारखंड जगुआर और सीआरपीएफ ने बोकारो जिले की लुगू पहाड़ी क्षेत्र में एक विशेष संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया. डीजीपी ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान अब तक 08 मृत शरीर, भारी मात्रा में हथियार और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गई हैं. (नीचे भी पढ़ें)
04 इंसास, 01 एसएलआर और एक रिवॉल्वर बरामद हुई है. वहीं प्रारंभिक जांच में, 08 मृत नक्सलियों में से तीन की पहचान की गई है, जिनमें विवेक उर्फ प्रयाग मांझी (केंद्रीय समिति सदस्य) पर 1 करोड़ रुपये का इनाम है. वहीं दूसरे नक्सली की पहचान अरविंद यादव (स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य) पर 25 लाख का इनाम था, इसके अलावा तीसरे नक्सली की पहचान साहेब राम मांझी (जोनल कमेटी सदस्य) के रूप में हुई, जिसपर 10 लाख रुपये का इनाम था. (नीचे भी पढ़ें)
झारखंड पुलिस के लिए प्रयाग मांझी उर्फ विवेक के मारे जाने की खबर कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस खूंखार नक्सली पर एक करोड़ का इनाम था और इस पर अकेले झारखंड गिरिडीह में पचास से अधिक मुकदमे दर्ज थे. दरअसल प्रयाग मांझी, अरविंद यादव और साहब राम मांझी के मारे जाने के पीछे झारखंड के तीन अफसरों की रात-दिन की मेहनत और सही कोऑर्डिनेशन जिम्मेदार है. डीजीपी अनुराग गुप्ता को जैसे ही प्रयाग मांझी के लोकेशन की जानकारी मिली, वैसे ही उन्होंने आइजी अभियान, अमोल वी होमकर और सीआरपीएफ आइजी साकेत सिंह को इसकी जिम्मेदारी दी. ऑपरेशन का नाम रखा गया डाकाबेड़ा. इसी ऑपरेशन डाकाबेड़ा के ज़रिए विवेक मांझी के दस्ते की घेराबंदी की गई. सीआरपीएफ आइजी साकेत सिंह और आइजी अभियान अमोल वी होमकर ने जबरदस्त सटीकता और सही जानकारी के साथ ऐसा तालमेल किया कि झारखंड का मोस्ट वांटेड प्रयाग मांझी सुबह का उगता हुआ सूरज भी ढंग से देख नहीं पाया. (नीचे भी पढ़ें)
मारा गया नक्सली प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा, जिसे फुचना, नागो मांझी और करण दा जैसे कई नामों से जाना जाता था, भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था. वह संगठन के लिए रणनीतिक और सैन्य मोर्चे पर काम करता था और हाल ही में झारखंड के पारसनाथ क्षेत्र की कमान उसे सौंपी गई थी, ताकि नक्सली गतिविधियों को फिर से संगठित किया जा सके. (नीचे भी पढ़ें)
विवेक दा धनबाद जिले के टुंडी थाना क्षेत्र के दलबूढ़ा गांव का रहने वाला था, लेकिन उसकी सक्रियता का क्षेत्र सीमित नहीं था. वह झारखंड के गिरिडीह, बोकारो, लातेहार से लेकर बिहार, बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक फैले नक्सली बेल्ट में संगठन के लिए वर्षों तक सक्रिय रहा. उसके खिलाफ केवल गिरिडीह में ही 50 से अधिक मामले दर्ज थे. माना जा रहा है कि जिस तरीके का कोऑर्डिनेशन इस बार झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने दिखाया है, उससे दूसरे नक्सली दस्तों के हौसले टूटे चुके हैं. आने वाले दिनों में सारंडा के जंगलों में भी छिपे नक्सलियों की शामत आनी तय है.



