रांची : झारखंड की राजधानी रांची में हुई महिला दारोगा संध्या टोपनो की मौत का मामला गर्माता नजर आ रहा है. तुपुदाना थाना में पदस्थापित दारोगा संध्या टोपनो को मंगलवार की मिड नाइट को गौ तस्करों ने उनको कुचल दिया था, जिससे उसकी मौत हो गयी. इस घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने सीधे तौर पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है. केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार की कमजोर कानून व्यवस्था का परिणाम इस तरह की घटना है. इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, रांची के सांसद संजय सेठ ने भी इसका जोरदार विरोध किया है. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने संध्या टोपनो की हत्या पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज रांची के तुपुदाना थाने में पदस्थापित दारोगा संध्या टोपनो के ऊपर वाहन चेकिंग के दौरान पिकअप वैन चढ़ाए जाने से उनकी मृत्यु हो गई. यह एक सुनियोजित साजिश लग रही है. प्रशासन इस मामले में गंभीरता दिखाएं. संध्या टोपनो के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं और विनम्र श्रद्धांजलि. इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यदि राज्य में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा. अपराधियों में कानून का खौफ नहीं है. गौ-तस्करों का मनोबल बढ़ा हुआ है. वहीं, सांसद संजय सेठ ने कहा कि वे सदन में इस मामले को उठाएंगे. प्रदेश में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है. इस प्रकरण को लेकर सवाल भी उठने लगे है. पूरे मामले को लेकर लोग सवाल उठा रहे है कि आखिरकार क्यों एक महिला सब इंस्पेक्टर को आधी रात ड्यूटी पर लगाया गया. वह भी तब जब तुपुदाना ओपी को नक्सल प्रभावित इलाके जैसा थाना है. संध्या के मौत के बाद परिवार वाले भी यह सवाल उठा रहे हैं कि एक महिला को रात की ड्यूटी देना कहां तक उचित है.
परिवार स्तब्ध, एमबीए की पढ़ाई की थी संध्या टोपनो
महिला दरोगा संध्या टोपनो की मौत से पूरा झारखंड राज्य स्तब्ध है. हर कोई इस दुख की घड़ी में संध्या की मां का ढ़ांढस बांधने में जुटा है लेकिन उनका रो-रोकर बुरा हाल है. वह बार-बार अपनी बेटी को याद करते हुए फफक पड़ती हैं. संध्या की मां स्नेहलता टोपनो रो-रोकर अपने बेटी के बचपन को याद कर रहीं हैं औऱ कह रही है कि संध्या शुरू से लड़कों के कपड़े पहनती थी. स्नेहलता टोपनो कहती हैं कि वह बचपन से पुलिस अफसर बनना चाहती थी. वो मेरी बेटी नहीं बेटा थी. उसके पापा जिंदा थे तब तक उसको इस पुलिस नहीं बनने दिया लेकिन पिता की मौत के बाद उसने जी तोड़ मेहनत की थी और पुलिस अफसर बन भी गई. वो मेरा अभिमान थी. बहुत मेहनती थी मेरी बेटी. परिजनों ने बताया कि संध्या की अब तक शादी नहीं हुई थी. सभी मां के साथ सिंह मोड़ के इलाके में रहते थे. संध्या ने एमबीए की पढ़ाई की थी उसके बाद इस फील्ड में आईं थी. संध्या बिशप वेस्टकाट से 10वीं पास किया था. उसने गोस्सनर कॉलेज से पढ़ाई की. कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद उसने रांची यूनिवर्सिटी से एमबीए भी कंप्लीट किया था. उनकी बड़ी बहन सीमा जो एक हाउसवाइफ हैं. संध्या के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. संध्या का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा। पुलिस लाइन में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी दी जा रही है.







