
रांची : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन तीन अहम विधेयकों को सरकार ने पारित कराये. हालांकि, बिजली बदहाली समेत अन्य मुद्दों को लेकर अंतिम दिन भी विपक्ष की पार्टी भाजपा के विधायकों ने अपना विरोध किया और धरना भी दिया. सदन में तीन विधेयकों को प्रस्ताव पारित कर दिया गया, जिसमें झारखंड विद्युत शुल्क संशोधन विधेयक 2021, कोर्ट फीस झारखंड संशोधन विधेयक 2021 और पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया. नये विधेयक के तहत पूर्वोत्तर भारत का पहला जनजातीय विश्वविद्यालय खोलने के लिए पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक को पारित किया गया. इसमें विश्वविद्यालय की संरचना से लेकर पदाधिकारियों के काम, नियुक्ति समेत तमाम मसलों का उल्लेख किया गया है. यह राज्य का पहला जनजातीय यूनिवर्सिटी होगी, जो जमशेदपुर में खोला जायेगा. सराकर ने जमशेदपुर के गालूडीह और घाटशिला के बीच करीब 20 एकड़ जमीन चिन्हित किया है, जहां इस तरह की यूनिवर्सिटी की स्थापना की जानी है. झारखंड विद्युत शुल्क संशोधन विधेयक 2021 में संशोधन की मांग को लेकर विधायक लंबोदर महतो, अनंत ओझा, रामचंद्र चंद्रवंशी, बंधु तिर्की, प्रदीप यादव, बिनोद सिंह ने अपना प्रस्ताव दिया, जो अस्वीकृत हो गया. देर शाम 7 बजे तक सदन की कार्यवाही संचालित हुई और फिर सदन के नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अंतिम भाषण के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने अपना आभार व्यक्त किया और अनिश्चतकाल के लिए सदन को स्थगित कर दिया गया. (नीचे देखे पूरी खबर)

विपक्ष तो दूर झामुमो के विधायकों ने ही सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री की भाभी ही धरने पर बैठी
सत्तारुढ़ झामुमो के विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने ही सदन में सरकार को घेरा और कहा कि सरकार शराब बेचने जा रही है. झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष सह गुरुजी शिबू सोरेन हमेशा शराब का विरोध करते थे, लेकिन इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है कि सरकार ही शराब को बेचने का विचार कर रही है. गुरुजी का बेटा शराब बेचे, इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि वे शिबू सोरेन का चेला है, ऐसा कतई होने नहीं देंगे. लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि शिबू सोरेन आज भी नशा के खिलाफ बात करते है. आपको बता दें कि झारखड सरकार राज्य शराब कि बिक्री बढ़ाने के लिए अलग-अलग राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर रही हैं. उत्पाद विभाग के अधिकारी छत्तीसगढ़ की नीतियों का अध्ययन कर रही है ताकि झारखंड की शराब बिक्री नीति को लागू किया जा सके. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी और जामा से झामुमो विधायक सीता सोरेन धरने पर ही बैठ गयी. वे अपनी ही सरकार की नीति का विरोध किया. उन्होंने कहा कि जल, जंगल,स जमीन की सुरक्षा को लेकर वे सदन में आयी है. सीसीएल की आम्रपाली परियोजना में वन भूमि पर अतिक्रमण कियका जा रहा है. अवैध तरीके से कोयले की ढुलाई की जा रही है. सदन में सरकार संतोषप्रद जवाब नहीं देती है. इसके बाद धरना पर बैठी सीता सोरेन को स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर सदन के अंदर बुलाया. इसके बाद सीता सोरेन ने फिर से वनभूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग सदन में की. (नीचे देखे पूरी खबर)

भाजपा के विरोध के बाद विधायक मनीष जायसवाल का निलंबन वापस होगा
भाजपा के विधायक सीपी सिंह ने सदन में कहा कि मंगलवार को कागज फाड़ने के लिए मनीष जायसवाल को निलंबित कर दिया गया जबकि सदन के सारे भाजपा के विधायकों को निलंबित कर दें क्योंकि किसी कानून के तहत यह निलंबन नहीं किया गया है. इसके निलंबन को वापस लेने के लिए सरकार के मंत्री आलमगीर आलम ने भी आग्रह किया, जिसके बाद निलंबन को वापस लेने का आदेश विधानसभा अध्यक्ष ने किया. भाजपा विधायक मनीष जायसवाल का निलंबन को वापस ले लिया गया. (नीचे देखे पूरी खबर)

पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने स्पष्ट की रणनीति, पेसा कानून का नियमावली नहीं बनाया गया
झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन हेमंत सोरेन की झारखंड सरकार ने माना कि राज्य में अब तक पेसा कानून का नियमावली नहीं बनाया गया है, जबकि केंद्र सरकार ने इसको लेकर दो बार राज्य सरकार को पत्र भेजा है. इसके बाद राज्य सरकार ने सदन में स्वीकार किया कि राज्य में पेसा नियमावली नहीं बनायी गयी है. सदन में विधायक दीपक बिरुआ ने इसको लेकर सवाल उठाया था. इसके आधार पर सरकार ने यह जवाब दिया. दीपक बिरुआ ने यह पूछा था कि सरकार संविधान के पांचवीं अनुसूची की मूल भावना के अनुरुप राज्य के अनुसूचित क्षेत्र के लिए ऐसे अपवादों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए पेसा नियमावली नहीं बनता, तब तक राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्र में पंचायत चुनाव पर रोक लगायेगी. इसके जवाब में सरकार की ओह से जानकारी दी गयी कि न्यायादेश के आलोक में समस्य राज्य में वर्ष 2010 औक 2015 में पंचायत चुनाव कराया जा चुका है. अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत चुनाव स्थगित रखने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. (नीचे देखे पूरी खबर)

राज्य में 73 फीसदी आरक्षण देगी सरकार, उपसमिति बनेगा
राज्य के संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने आजसू सुप्रीमो विधायक सुदेश महतो के सवाल के जवाब में कहा कि राज्य में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति समेत पिछड़े वर्ग को कुल 73 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास विचाराधीन है. सरकार अगले दो माह में एक उपसमिति बनाकर इस पर विचार करेगी. कुल 73 फीसदी आरक्षण में एसडी को 32, एससी को 14 और पिछड़े वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव है. शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सुदेश महतो अनुपस्थित थे, लेकिन इसकी जगह आजसू विधायक लंबोदर महतो ने उनके सवाल रखे. लंबोदर महतो ने कहा कि राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में नामांकन में पिछड़े वर्ग को 14 फीसदी, अनुसूचित जाति को 10 फीसदी और अनुसूचित जनजाति को 26 फीसदी आरक्षण दिया गया है. अपाको बता दें कि वर्ष 2000 में मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी, अनुसूचित जाति को 14 फीसदी और अनुसूचित जनजाति को 32 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा की थी, जो 73 फीसदी आरक्षण था. लेकिन आज तक इसको लागू नहीं किया गया. (नीचे देखे पूरी खबर)

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा-पेयजल विभाग के सचिव विधायक का सम्मान नहीं करते.
महगामा की कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने विधानसभा में पेयजल आपूर्ति विभाग के सचिव पर विधायक का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनके चेंबर में जाने पर ना ही वे खड़े होते है और ना ही फोन मिस करने पर वे कॉल बैक करते हैं. दीपिका पांडेय सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष से इस बात की शिकायत की. उन्होंने कहा कि अन्य विभागों के प्रिंसिंपल सेक्रेटरी फोन नहीं उठाने की स्थिति में कॉल बैक करते है, लेकिन पेयजल विभाग के सचिव फोन नहीं उठाते और ना ही कॉल बैक करते है. दीपिका पांडेय के सवाल पर पेयजल विभाग के मंत्री मिथलेश ठाकुर ने कहा कि सरकार 10 लाख घरों तक जल का संयोजन करने में सफल हुई है और 2024 तक हर घर में नल से शुद्ध जल पहुंचाने का लक्ष्य है. इसके तहत 59 लाख 23 हजार से अधिक घरों तक पानी पहुंचाने का काम सरकार करेगी.




