
रांची : वर्ष 2022-23 की अवधि के लिए मंदिरा की खुदरा बिक्री की अनुमतियों की बंदोबस्ती के संबंध में विरोध तेज हो गया है. इसको लेकर नीति में किये जा रहे बदलावों समेत अन्य चीजों को लेकर विरोध शुरू हो गया है. झारखंड खुदरा शराब विक्रेता संघ ने यह विरोध किया है. उत्पाद विभाग और उत्पाद मंत्रालय को इसको लेकर विरोध पत्र भी शराब विक्रेताओं ने सौंपा है और मांग की है कि उनके लाइसेंस का एक साल स्वत: एक्सटेंशन कर दिया जाये. संघ की ओर से दिये गये पत्र में कहा गया है कि झारखंड खुदरा शराब विक्रेता संघ उनको ज्ञात हुआ है कि विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिए 2300 करोड़ रुपये उत्पाद राजस्व की वसूली का प्रस्तावित किया गया है एवं इसके प्राप्त हेतु उपाय सुझाने के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड को पराशी एजेंसी करने का निर्णय लिया गया है. यह भी सुनने में आ रहा है कि विभाग मदिरा की खुदरा अनुज्ञप्तियों की बंदोबस्ती के लिए छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति को लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं. प्राप्त सूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य की वर्तमान आबकारी नीति के तहत सभी प्रकार की मदिरा की खुदरा दुकाने सीएसएमसीएल द्वारा संचालित की जाती है. लेकिन दुकानों के लिए प्रबंधक लेखपाल आदि कॉर्मिक आउटसोलिंग कंपनियों द्वारा कराए जाते हैं. यदि मदिरा की खुदरा दुकान के स्थापन एवं संचालन के लिए छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाया जाता है तो स्पष्टत झारखण्ड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) द्वारा राज्य में मंदिर की खुदरा दुकान संचालित की जायेगी. पत्र में बताया गया है कि पूर्व में विभाग द्वारा सरकारी स्तर पर मदिरा की खुदरा दुकानों को संचालित किये जाने की नीति अपनायी गई थी और 2017-2018 में अगस्त से मार्च तक तथा 2018-19 में पूरे वर्ष राज्य में मदिरा की बिक्री निगम द्वारा संचालित की गई थी. वर्ष 2017-2018 में उत्पाद राजस्व का संग्रह 847.24 रुपये ही हो सका जबकि उसके पूर्व वर्ष 2016-2017 में उत्पाद राजस्व का सदन 957.62 करोड़ रुपये हुआ था. वर्ष 2018-2019 में उत्पाद राजस्व संग्रहन में मामूली वृद्धि दर्ज हुई. जेएसबीसीएल द्वारा मदिरा की खुदरा दुकानों के संचालित किए जाने का निर्णय अनुत्पादक साबित हुआ और विभाग द्वारा इस जेएसबीसीएल द्वारा मदिरा की खुदरा दुकान संचालित किए जाने के अपने निर्णय नई नीति अपनायी गई और इसे कार्यान्वित करने के लिए झारखण्ड उत्पाद मदिरा की खुदरा अलग से नियम लाया गया और सबकी बंदोबस्ती की गयी. नये नियम के तहत वर्ष 2019-20 यानी बंदोबस्त के प्रथम वर्ष में उत्पाद राजस्व का लक्ष्य 1800 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था जिसके बदले 2009.61 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ. वर्ष 2020-2021 का लक्ष्य 2300 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया, लेकिन कोविड 19 महामारी के कारण लॉकडाउन में लगभग दो महीने तक दुकानें बंद रही. लॉकडाउन की अवधि में आर्थिक गतिविधियों के बंद रहने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
इन लोगों ने आग्रह किया है कि 31 मार्च 2022 को समाप्त होने वाली अनुज्ञप्ति अधिकार अगले एक वर्ष यानी 2022-23 के लिए किया जाये या विकल्पत मदिरा की खुदरा दुकानों की बंदोबस्ती एवं संचालन के लिए प्रवृत वर्तमान के उपबन्धों के अधीन दुकानों की बंदोबस्ती की जाये.






