
धालभूमगढ़ : प्रखंड की रावताड़ा पंचायत का गुड़काइकोचा गांव निवासी नरेन मुर्मू बचपन से ही विक्षिप्त है. नरेन मुर्मू के उपचार के लिए परिजनों ने काफी प्रयास किया परंतु वह ठीक नहीं हो पाया है. मजबूरन परिवार के सदस्यों ने नरेन मुर्मू के पैरों में लोहे की बेड़ियां डाल दी है, ताकि वह कहीं भाग न सके. विगत 2 वर्षों से उसकी जिंदगी बेड़ियों में जकड़ी हुई है. नरेन मुर्मू की मां मालती मुर्मू ने कहा कि नरेन मुर्मू बचपन से ही विक्षिप्त है. उसके उपचार के लिए कई बार कई स्थानों पर ले जाया गया, परंतु वह ठीक नहीं हो पाया है. परिवार के सदस्यों ने कहा कि आर्थिक कमी के कारण उसे रांची नहीं ले जाया जा सका है. नरेन की दिमागी हालत ठीक नहीं रहने के कारण वह कई बार गांव से भाग चुका है. काफी खोजबीन करने के पश्चात दोबारा मिला है. वह दोबारा न भाग सके इस कारण उसके दोनों पैर में बेड़ियां डाल दी गयी हैं. इधर विक्षिप्त नरेन मुर्मू को बेड़ियों में जकड़ कर रखने की सूचना पाकर धालभूमगढ़ थाना प्रभारी संतन तिवारी गांव पहुंचे और विक्षिप्त युवक को रेस्क्यू किया है. थाना प्रभारी ने बताया कि विक्षिप्त युवक के साथ पिता चंद्रमोहन मुर्मू, मां मालती मुर्मू को साथ लेकर धालभुमगढ़ पहुंचे हैं. थाना प्रभारी ने कहा कि विक्षिप्त युवक के उपचार के लिए उसे रांची मेंटल अस्पताल भेजा जाएगा, जिसकी तैयारी आज पूरी कर ली गई है. बुधवार की सुबह युवक को परिवार के साथ रांची रवाना किया जाएगा. थाना प्रभारी ने कहा कि उसे परिवार के साथ धालभूमगढ़ सीएचसी में डॉक्टर की निगरानी में रखा गया है.







