
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिलें में फर्जी कागजात दिखाकर जीएसटी चोरी करने का एक मामला प्रकाश में आया है. फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर जालसाजी और धोखाधड़ी के माध्यम से जीएसटी के दो मामलों में सरकार का 15 करोड़ रुपये हड़पने के मामले में चाईबासा पुलिस ने दो दिनों पूर्व जमशेदपुर के सोनारी से कमल राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. वहीं, अब एक और टैक्स में हेराफेरी करने का नया मामला सामने आया है. यह मामला है झींकपानी स्थित एसीसी सीमेंट फैक्ट्री के एक बड़े ठेकेदार का. मेसर्स एसएन इंटरप्राइजेज नामक इस ठेका कंपनी के मालिक सुदीप नाग द्वारा एसीसी फैक्ट्री में बरसों से लोडिंग की ठेकेदारी की जा रही है. साल में करोड़ों का व्यवसाय करने वाली इस कंपनी ने पिछले 2 साल से कंपनी से प्राप्त जीएसटी की राशि सरकार के खजाने में जमा नहीं किया है. लिहाजा राज्य कर विभाग चाईबासा अंचल कार्यालय ने एसएन इंटरप्राइजेज के खिलाफ 2 करोड़ 34 लाख रुपयों के टैक्स में गड़बड़ी का नोटिस जारी किया है. एसएन इंटरप्राइजेज ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में एक करोड़ 80 लाख रुपये का जीएसटी जबकि वित्तीय वर्ष 2019-2020 के मात्र दो तिमाही में ही 54 लाख रुपये का जीएसटी जमा नहीं किया. नोटिस जारी कर दिए गए समय सीमा के भीतर भी ठेका कंपनी ने जीएसटी की रकम जमा नहीं किया. ऐसे में राज्य कर विभाग ने एसीसी कंपनी को नोटिस कर ठेकेदार को भुगतान करने पर रोक लगा दी तथा ठेकेदार को भुगतान होने वाली राशि एक करोड़ 14 लाख रुपैया की वसूली एसीसी कंपनी से करने को मजबूर हुई. कंपनी से करोड़ों रुपये जीएसटी के रूप में लेने के बावजूद भी सरकार के खजाने में जमा नहीं करने पर एसीसी कंपनी ने एसएन इंटरप्राइजेज को ब्लैक लिस्टेड करते हुए काम से निकाल दिया है. कंपनी ने कई बार उसे जीएसटी जमा करने के लिए नोटिस दिया था. ठेका कंपनी ने बार-बार पैसा जमा करने के लिए समय मांगा, लेकिन जमा नहीं किया. वहीं, दूसरी ओर कोरोना का हवाला देकर अब एसएन इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर एसएन नाग अपीलीय प्राधिकरण में जाकर जीएसटी की बकाया राशि जमा नहीं कर सरकारी राजस्व का चूना लगाने के फिराक में है. वहीं, टैक्स वसूली में विभाग की शिथिलता भी समझ से परे है. राज्य कर उपायुक्त चाईबासा रतन लाल गुप्ता का कहना है कि मेसर्स एसएन इंटरप्राइजेज, जो रिटर्न और ट्रांजेक्शन फाइल किया गया था, उसमें अनियमितता पायी गई थी. इस पर उनको नोटिस जारी किया गया. उनको बार-बार बुलाने पर भी नहीं आने पर उनके व्यवसायिक प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया गया. उसके आधर पर डिमांड तैयार किया गया. व्यवसायी ने अपीलीय न्यायालय में इसके खिलाफ अपील की है, जहां से उसे स्टे मिला हुआ है. वहां से कोई आदेश आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. कोल्हान वैसे जीएसटी चोरों का अड्डा बन चुका है. अब तक कई मामले सामने आ चुके है. दस से अधिक एफआइआर हो चुका है. अब उनकी संपत्तियों को अटैच करने की तैयारी शुरू कर दी गयी है. संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी की गयी है. इसको लेकर विभागीय तौर पर कदम उठाया गया है.





