
सरायकेला : रांची- टाटा- बहरागोड़ा एनएच 33 फोर लेन का काम पिछले कई सालों से चल रहा है. इस दौरान इस सड़क पर कई दुर्घटनाएं हुईं हैं, कुछ मानवीय भूल से, तो कुछ सड़क निर्माण में लगी कंपनी की भूल से. ऐसे में अगर कोई खुद मौत को दावत दे तो उसे क्या कहेंगे. ये जो नजारा आप देख रहे हैं, ये नजारा है सरायकेला जिले के चौका से होकर गुजर रहा एनएच 33 का. जहां फ्लाई ओवर का काम युध्द स्तर पर चल रहा है. लेकिन इन तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं किस तरह फ्लाई ओवर निर्माण कार्य में लगे मजदूर बगैर सेफ्टी के काम करते नजर आ रहे हैं. ऊंचाई पर काम करने के दौरान मजदूर न तो सर पर सेफ्टी हेलमेट पहने नजर आ रहे, न ही सेफ्टी बेल्ट. अब इसे खुल्लम- खुल्ला मौत को आमंत्रण समझे या कुछ और. संवेदक और सड़क निर्माण कार्य में जुटे मजदूरों के पास हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं मिला. मतलब साफ है, कि इंसानी जान की कीमत पर विकास के आयाम गढ़े जा रहे हैं. ईश्वर न करे कल कोई हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेवारी किसकी होगी !





