
जमशेदपुर : टाटा समूह से अलग होने को लेकर शापूरजी पालनजी समूह की ओर से अधिकारिक तौर पर बयान दिया गया था, लेकिन यह झूठा साबित होता नजर आ रहा है. इस बयानबाजी की घटना के करीब 20 दिनों के बाद तक टाटा समूह को किसी तरह का कोई प्रस्ताव टाटा समूह को प्राप्त नहीं हुआ है. टाटा समूह की ओर से इस मसले पर अधिकारिक बयान दिाय गया है. इसमें टाटा समूह ने कहा है कि अब तक टाटा समूह को शापूरजी पालनजी समूह का अलग होने का औपचारिक तौर पर कोई आग्रह या प्रस्ताव नहीं मिला है. सुप्रीम कोर्ट के शापूरजी पालनजी समूह पर टाटा संस के शेयर रखने से रोक ल गने के बाद शापूरजी पालनजी समूह ने 22 सितंबर को बयान जारी किया था, जिसमें यह कहा गया था कि टाटा समूह से वे लोग अलग होने जा रहे है, जिसका समय अब आ चुका है. आपको बता दें कि टाटा संस में शापूरजी पालनजी समूह की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है. टाटा संस ने अलग होने के मसले पर शापूरजी पालनजी के प्रेस स्टेटमेंट पर अपना प्रेस रिलीज जारी किया है, जिसमें कहा है कि शापूरजी पालनजी समूह के इस बयान से मीडिया में काफी अटकलों को जन्म दे रहा है. इस मामले में हमे शापूरजी पालनजी समूह की ओर से अब तक कोई अधिकारिक व्यक्तव्य प्राप्त नहीं हुआ है. टाटा समूह ने कहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है इस कारण वह कोर्ट की गतिविधायं दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे है. इसको लेकर 28 अक्तूबर को सुनवाई की तिथि निर्धारित है. टाटा समूह और सायरस मिस्त्री के बीच विवाद तब हुआ था जब टाटा संस के चेयरमैन पद से सायरस मिस्त्री को हटा दिया गया था. इसके बाद से यह विवाद कई जगहों पर गया, लेकिन अब तक कोई रास्ता नहीं निकला है. वैसे समय में शापूरजी पालनजी समूह ने अपने से कह दिया था कि वे टाटा समूह से अलग होना चाहते है.





