जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत रोहिणी बेड़ा, बड़ा झरनागीह, भाटिन एवं तिलाईटांड़ की संयुक्त ग्राम सभाओं ने ग्राम सभा अधिकारों, पारंपरिक व्यवस्था, सामुदायिक संसाधनों तथा अनुसूचित क्षेत्रों में लागू पेसा अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जमशेदपुर के उपायुक्त को अंतिम आवेदन सौंपा है. संयुक्त ग्राम सभाओं की ओर से दिए गए आवेदन में कहा गया है कि बड़ा झरनागीह क्षेत्र में मां रंकिनी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास सहित विभिन्न निर्माण कार्य ग्राम सभा की अनुमति एवं सहमति के बिना कराए जा रहे हैं. इस संबंध में पूर्व में कई बार लिखित आवेदन एवं ज्ञापन दिए जाने के बावजूद अब तक न तो निष्पक्ष जांच कराई गई है और न ही ग्राम सभाओं को कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई गई है. ग्राम सभाओं का आरोप है कि संबंधित परियोजनाओं के संबंध में स्वीकृति, कार्यादेश, वित्तीय प्रावधान एवं ग्राम सभा प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में भ्रम, असंतोष एवं अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो गई है. (नीचे भी पढ़ें)
संयुक्त ग्राम सभाओं ने प्रशासन से आगामी 10 दिनों के भीतर मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराए जाने, जांच से संबंधित अधिकारियों एवं प्रक्रिया की जानकारी ग्राम सभाओं को उपलब्ध कराए जाने, ग्राम सभा की अनुमति एवं सहमति के बिना किए जा रहे कार्यों की वैधानिकता की जांच कराने, पेसा अधिनियम एवं ग्राम सभा अधिकारों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किए जाने, मां रंकिनी मंदिर परिसर सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास से जुड़ी सभी परियोजनाओं की स्वीकृति, कार्यादेश, वित्तीय प्रावधान एवं ग्राम सभा प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाने, जांच पूरी होने तक विवादित कार्यों पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए उचित निर्णय लिए जाने की मांग की गयी है. (नीचे भी पढ़ें)

संयुक्त ग्राम सभाओं ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित 10 दिनों के भीतर मामले की निष्पक्ष जांच कर लिखित रूप से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे अपने संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे. इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. इस आवेदन पर ग्राम सभा बड़ा झरनागीह, ग्राम सभा रोहिणी बेड़ा, ग्राम सभा भाटिन एवं ग्राम सभा तिलाईटांड़ के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं.






