
मुंबई/जमशेदपुर : गुजरात के अहमदाबाद से मुंबई जाते समय टाटा संस के पूर्व चेयरमैन और कारपोरेट जगत के बड़ी हस्ती सायरस मिस्त्री की मौत के बाद शोक का माहौल कारपोरेट जगत में है. हादसा रविवार की दोपहर हुई थी, लेकिन अब तक कोई उससे ऊबर नहीं पाया है. उनका अंतिम संस्कार मंगलवीर की सुबह दस बजे मुंबई के वर्ली शमशान घाट पर किया जायेगा. इससे पहले सायरस मिस्त्री के शव का सोमवार को पोस्टमार्टम किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पैर और सिर में गंभीर चोटे लगने की पुष्टि हुई है. इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आयी है. प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर में चोट लगने की वजह से सायरस मिस्त्री और उनके दोस्त जहांगीर की मौत हुई है. आगे की जांच के लिए उनका बिसरा भी सुरक्षित रखा गया है. पोस्टमार्टम में यह बातें सामने आयी है कि सायरस मिस्त्री के शरीर के अंदरुनी हिस्से में बहुत गंभीर चोटें आ गयी थी, जिससे उनकी मौत हुई है, जिसको मेडिकल शब्दों में पोलीट्रोमा कहा जाता है. इस कारण ही उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी. चूंकि, सायरस मिस्त्री का परिवार विदेशों में रहता है, इस कारण सारे लोग आने वाले है, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. वैसे परिवार ने शोक संवेदना जारी करते हुए कहा है कि उनका अंतिम संस्कार मंगलवार की सुबह किया जायेगा. लेकिन यह भी लिखा है कि किसी को मातमपूरसी करने आने की जरूरत नहीं है.

मर्सडीज जैसी कार में कैसे हो गयी मौत, यहां हुई लापरवाही, जिससे मारे गये इतने बड़े कारपोरेट हस्ती
सायरस मिस्त्री की मौत से कारपोरेट जगत में सकते में है. श्री मिस्त्री की कार मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाइवे के एक पुल की रेलिंग से टकाकर हुई. हादसे में उनके दोस्त जहांगीर दिनशा पंडोले की भी मौत हो गयी. सायरस मिस्त्री 70 लाख रुपये की मर्सीडीज बेंच जीएलसी जैसे एसयूवी में सवार थे, लेकिन इसके बावजूद उनकी मौत हो गयी. उक्त कार को आराम से लेकर सुरक्षा तक के तमाम दावों के साथ देखा जाता है. पुलिस के अनुसार, फ्रंट सीट पर जहांगीर के भाई दारिस पंडोले और उनकी पत्नी अनायता बैठे थे. उनकी पत्नी अनायता पंडोले कार चला रही थी. सायरस मिस्त्री और जहांगीर पंडोले पीछे की सीटों पर बैठे थे, जिनकी मौत हुई है. बताया जाता है कि अब तक की जांच में यह बातें सामने आयी है कि सायरस मिस्त्री और जहांगीर पंडोले सीट बेल्ट पीछे नहीं लगाये थे. अमूमन सारे लोग पीछे की सीट में सीट बेल्ट नहीं लगाते है. वैसे ही लापरवाही दोनों ने की थी. वहीं आगे की सीट पर बैठे दोनों लोग सीट बेल्ट लगाये हुए थे. इस कारण दोनों की जान बच गयी, लेकिन पीछे के दोनों लोगों की जान चली गयी. अब तक की जांच में यह बातें सामने आयी है कि मर्सीडीज में सवार चार लोग एक दोस्त के यहां से लंच के बाद लौट रहे थे. गाड़ी तीन लेन वाले चरोटी टोल नाके से निकलकर एक किलोमीटर ही आगे बढ़ी थी कि यह हादसा हो गया. 4 सितंबर रविवार की दोपहर को यह घटना दोपहर करीब सवा तीन बजे घटी थी. अब तक की शुरुआती जांच में यह बातें सामने आयी है कि गाड़ी चला रही अनायता ने पुराने पुल को टेकओवर करते समय कार पर कंट्रोल खो दिया. पुराने पुल नये वाले पुल से नीचे है. कार की रफ्तार काफी ज्यादा थी और अनायता तय नहीं कर पायी कि कौन से पुल से जाना है, जिस कारण बीच में वह पुल के पोल में टकरा दी, जिससे यह घटना घटी. जानकारी मिली है कि दोनों के सिर फ्रंट सीट से जा टकराये, जिस कारण दोनों की मौत हुई. बताया जाता है कि मर्सीडीज बेंज जीएलसी में पीछे की सीट पर बैठे यात्रियों के साइड़ में कर्टेन एयरबैस्स होते है, जो सीट बेल्ट लगाने के कारण खुलते है. सीट बेल्ट नहीं लगाने के कारण वह खुले, लेकिन देर से खुले. हादसा इतना भयावह था कि कार का इंजिन पहियों के पीछे चला गया. बोनस सही सलामत था. आसपास कोई सीसीटीवी नहीं था, जिस कारण पूरी पुटेज नहीं दिख पायी. वैसे यह जांच में पाया गया है कि कार का रजिस्ट्रेशन नंबर एमएच 47बी-एबी-7705 है, जिसका रजिस्ट्रेशन 2018 में हुआ था और उसका फिटनेस सर्टिफिकेट 2033 मई तक थी. जांच में यह भी सामने आयी है कि 9 मिनट में करीब 20 किलोमीटर यह गाड़ी चली थी. इससे गाड़ी के स्पीड का अंदाजा लगाया जा सकता है.






