जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के बोनस समझौता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एनएस ग्रेड और ओल्ड सीरीज के कर्मचारी और कमेटी मेंबर आमने सामने है. वहीं, इस पूरे मामले में प्लानिंग विभाग के कमेटी मेंबर बिमल कुमार ने बेबाकी से वाट्सएप ग्रुप पर अपनी राय साझा की है. उन्होंने कहा है कि बोनस नहीं बल्कि सोच पर हमला है. मजदूर एकता की सबसे बड़ी परीक्षा है. उन्होंने सवाल जवाब के माध्यम से कहा है कि क्या बोनस फ्लैट की मांग कोई साधारण सुझाव है या फिर यह उसी ‘पीएमएस मॉडल’ की बैकडोर एंट्री है, जिसका हमने हमेशा विरोध किया? उन्होंने कहा है कि लगता है जैसे किसी ने फिर से ‘सुपारी’ ले ली है जैसे पहले डीए फ्रिज कराया गया, मेडिकल सुविधा बंद करवाई गई और मज़दूर की स्थायी सुविधाएं ‘कॉस्ट कटिंग’ के नाम पर धीरे-धीरे छीनी गईं. इस बार निशाना बोनस है. अगली बार ग्रेड, इन्क्रीमेंट और स्थायीत्व होंगे. बिमल कुमार को अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु का करीबी माना जाता है. श्री बिमल ने कहा कि ये ट्रेलर है, असली पिक्चर अभी बाकी है. अब बात सिर्फ बोनस की नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली और मज़दूरों के भविष्य की है. (नीचे भी पढ़ें)

ब्लॉक वाइज बोनस की मांग पूरी तरह भ्रामक, राजनीति-प्रेरित और नुकसानदेह है. वर्तमान प्रणाली में सभी को बोनस समान प्रतिशत (17 से 20 फीसदी) के रूप में मिलता है. राशि तय होती है साल भर के बेसिक व डीए के अनुसार. जिसका वेतन ज़्यादा, उसका बोनस ज़्यादा, यही न्यायसंगत, पारदर्शी और प्रेरक प्रणाली है. बोनस की अधिकतम सीमा 20 फीसदी है. यह श्रम विभाग की बाध्यता है. इससे ऊपर कुछ भी वादा करना या मांगना, केवल भ्रम फैलाना है. बिमल कुमार यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि 2030 तक ज़्यादातर ओल्ड सीरीज (ओएस) कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे, तब खुद-ब-खुद बोनस का औसत 18 से 20 फीसदी के बीच रहेगा. कोई नया फार्मूला या खेल की ज़रूरत नहीं, लेकिन असल मंशा कुछ और है. पहले सुपरवाइजर बनाम वर्कर, फिर टी सीरीज बनाम एनएस ग्रेड, फिर ओल्ड बनाम न्यू ग्रेड, अब एनएस-0 बनाम टीएसटीएल का नया मोहरा खड़ा किया गया है. हर बार मज़दूर आपस में लड़ाया गया, और फायदा किसी तीसरे ने उठाया. बिमल कुमार ने कहा कि 4 से 5 हज़ार रुपये के तात्कालिक लाभ के लिए, पूरी मज़दूर प्रणाली को दांव पर लगाना आत्मघाती होगा. बिमल कुमार ने कहा कि अब तक का अनुभव कहता है, पीसदी आधारित बोनस प्रणाली ही सबसे स्थायी, पारदर्शी और निष्पक्ष हैं. इसे तोड़ने का मतलब है, अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है.



