
जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के प्रति जबरदस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है. टाटा स्टील के कर्मचारियों का नये वेतनमान के तहत 1 जनवरी 2020 से लेकर अब तक का पेमेंट स्लिप सोमवार को मिल गया. कर्मचारी तब हक्के-बक्के रह गये जब वेतन स्लिप कर्मचारियों ने देखा और पाया कि एक जनवरी 2020 से उनको मिलने वाला महंगाई भत्ता (डीए) फ्रीज हो गया है. जब वेज रिवीजन समझौता 23 जनवरी 2020 को हुआ था, तब यह कहा गया था कि कर्मचारियों का डीए एक अप्रैल 2020 से फ्रीज होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. एक जनवरी 2020 से ही डीए फ्रीज हो चुका है. लिहाजा, कर्मचारियों का पैसा इस बार के वेतन स्लिप में काफी कम मिला, जिससे कर्मचारियों में गुस्सा है. गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने कहा था कि एक अप्रैल 2020 से डीए फ्रीज होगा, लेकिन वह झूठ था जबकि डीए एक जनवरी 2020 से ही फ्रीज हो गया है.
क्या है डीए फ्रीज का मामला, विस्तार से जानिये :
टाटा स्टील के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) अब तक कर्मचारियों के बेसिक पर मिलता था. एआइसीपीआइ यानी ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के हिसाब से डीए बेसिक पर मिलता था यानी बेसिक जितना भी होगा, उसके आधार पर डीए मिलेगा. वेज रिवीजन समझौता 23 सितंबर 2019 को जब हुआ, तब तय हुआ कि डीए अब फ्रीज हो जाया करेगा यानी अगर कोई एस-1 ग्रेड का कर्मचारी है और उसका न्यूनतम वेतनमान 10 हजार रुपये है और एस 1 ग्रेड में अधिकतम कर्मचारी का वेतन 20 हजार रुपये ही जा सकता है और 3 फीसदी इंक्रीमेंट मिलेगा तो अगर 3 फीसदी इंक्रीमेंट जुड़ते हुए 20 हजार हो जाता है या उससे ज्यादा बेसिक मिलने भी लगेगा तो उनका डीए वहीं अंतिम वेतनमान यानी 20 हजार रुपये पर ही मिलेगा, उसके 20 हजार रुपये बढ़े हुए वेतन पर डीए नहीं मिलेगा. 23 सितंबर 2019 को हुए वेतन समझौता के वक्त यह कहा गया था कि नया डीए का सिस्टम एक अप्रैल 2019 से लागू होगा, लेकिन यह जनवरी 2020 से ही लागू कर दिया गया, जिससे कर्मचारियों में गुस्सा है.







