
जमशेदपुर : टाटा स्टील की स्थापना के बाद वर्ष 1921 में जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित शावक नानावती टेक्निकल इंस्टीच्यूट (एसएनटीआइ) की स्थापना की गयी थी. एक नवंबर 2021 को इसके 100 साल पूरे होने वाले है. इसको पहले जमशेदपुर टेक्निकल इंस्टीच्यूट (जेटीआइ) के रुप में जाना जाता था. 1921 का वह दौर था, जब तकनीक को और बेहतर करने और लोगों को तकनीकि तौर पर दक्ष करने की मुहिम जमशेदपुर में शुरू हुई थी, जो पहले जमशेदपुर टेक्निकल इंस्टीच्यूट के नाम से जाना गया और फिर उसका नाम एसएनटीआइ हो गया. पहले टाटा स्टील ने इसकी स्थापना टेक्निकल तौर पर कर्मचारियों और अधिकारियों को ट्रेनिंग देने के लिए तैयार कराया गया था, जिसके माध्यम से विश्वस्तरीय स्टील का उत्पादन किया जा सके. 1 नवंबर 1921 को स्थापित इस संस्था के पहले डायरेक्टर इनचार्ज बीजे पादशाह थे. इसकी जरूरत तब पड़ी थी, जब टाटा स्टील इसका विस्तार करने वाली थी. (नीचे देखे पूरी खबर)

स्थापना के बाद वर्ष 1930 से अप्रेंटिस की ट्रेनिंग यहां शुरू हो गयी. सुपरवाइजर स्तर पर बहाली के लिए अप्रेंटिस ट्रेनिंग करायी गयी, जिसके तहत टेक्निकल एजुकेशन एडवाइजरी कमेटी का गठन 18 जुलाई 1930 को किया गया, जो अप्रेंटिसशिप स्कीम के तहत बहाली शुरू की गयी और ट्रेनिंग की शुरुआत की गयी. 18 साल की उम्र के युवाओं को क्लास ए, बी और सी क्लास की ट्रेनिंग दी गयी. जो पढ़े लिखे मजदूर थे, उनका चयन इसके लिए किया गया. ऐसे लोगों को दक्षता तक पहुंचाने के लिए टाटा स्टील की ओर से कई तकनीकी जानकारों को जोड़ा गया और प्लांट ट्रेनिंग भी शुरू की गयी. इसके बाद 1955 में टाटा स्टील अपने प्लांट का विस्तार 2 मिलियन टन तक करने की शुरुआत की. इसके लिए डिमांड तकनीकी जानकारों की बढ़ने लगी तो टाटा स्टील की एसएनटीआइ ने साइंस ग्रेजुएट को स्किल्ड जॉब देने के लिए 1930 में नयी योजना लायी, जिसके तहत फिर से तकनीकी लोगों को तैयार किया जाने लगा. (नीचे देखे पूरी खबर)

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा होल्डर की ट्रेनिंग देने के लिए जूनियर सुपरवाइजरी ट्रेनिंग स्कीम 1967 में लांच किया गया. इसके बाद 1969 में टेक्निकल प्रोबेशनर ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत की गयी. इसके बाद टाटा स्टील के टेक्निकल ट्रेनिंग डिवीजन ने 1989 दिसंबर में नीदरलैंड के हुगओवेंस टेक्निकल सर्विसेज के साथ पांच साल का समझौता किया ताकि यहां एडवांस ट्रेनिंग की शुरुआत हो सके. इस कंपनी के साथ मिलकर एसएनटीआइ को एडवांस ट्रेनिंग सेंटर के रुप में विकसित किया गया. इसके बाद कई सारे तकनीकी मशीन और सिमुलेटर्स की स्थापना की गयी. 3 मार्च 1995 तक इसकी स्थापना कर ली गयी और तकनीकी ट्रेनिंग को और बेहतर बनाया गया. इस बीच 1992 में जमशेदपुर टेक्निकल इंस्टीच्यूट के नाम को शावत नानावती टेक्निकल इंस्टीच्यूट रख दिया गया, जो टाटा स्टील के पहले ग्रेजुएट ट्रेनी थे, जो बाद में जकर टाटा स्टील के एमडी बने. इस बीच 1993 में प्रोसेस ऑपरेशन की ट्रेनिंग शुरू कर दी गयी. (नीचे देखे पूरी खबर)

इसके बाद वर्ष 200 के बाद तो संस्था और तेजी से प्रगति की और लगातार यहां तकनीकी ट्रेनिंग को और धारदार बनाया गया. पिछले तीन साल में टाटा स्टील के करीब 60 हजार वेंडर (ठेका कंपनियों) के कर्मचारियों को 140 स्किल्ड ट्रेड में ट्रेनिंग देकर उनको दक्ष बनाया गया है. अब टाटा स्टील की एसएनटीआइ डिजिटल की दुनिया में क्रांतिकारी कदम उठा रही है. टाटा स्टील डिजिशाला का संचालन भी इसके माध्यम से हो रहा है जबकि 27 स्कूलों का संचालन भी इसके जरिये संचालित हो रहा है, जिसमें कई सारे तकनीकी सर्टिफिकेशन कार्यक्रम संचालित किये जा रहे है. जेएन टाटा वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट (जेएनटीवीटीआइ) का संचालन 2015 से ही एसएनटीआइ द्वारा संचालित की जा रही है. झारखंड और ओड़िशा में 6 कैंपस का संचालन वर्तमान में जेएनटीवीटीआइ के माध्यम से हो रहा है. समय के साथ बदलाव की गवाह बनी एसएनटीआइ अब तकनीकी शिक्षा और ट्रेनिंग की व्यवस्था को आने वाले पांच से दस सालों में और बेहतर करने जा रही है ताकि क्लास वर्चुअल तरीके से भी हो सके और किसी तरह की ट्रेनिंग पर असर भी नहीं पड़ सके.



