
जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन के फंड का अभी किसी तरह का समाजसेवा या सीएसआर के लिए इस्तेमाल नहीं होगा. टाटा वर्कर्स यूनियन ने इस फैसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय के बीच सीएसआर फंड को लेकर बुधवार की सुबह ग्यारह बजे से मीटिंग हुई. इस मीटिंग में सीएसआर की राशि को खर्च करने के प्रस्ताव पर बातचीत हुई. इस बातचीत के दौरान अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने सबसे पहले डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय से पूछा कि क्या किया जाना चाहिए. इस पर डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय ने कहा कि 35 से 36 करोड़ रुपये यूनियन का एकाउंट में जमा है. इस पैसे को समाज की सेवा के लिए किया जाना चाहिए. इसके बाद अध्यक्ष ने महामंत्री सतीश सिंह से पूछा कि बताये कि क्या किया जाना चाहिए. सतीश सिंह ने कहा कि वे भी चाहते है कि समाज की सेवा करें, लेकिन चूंकि, मजदूरों का ही यह फंड है, इस कारण इसका बेजां इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. वैसे भी अब तक ऐसा कोई दृष्टांत कभी यूनियन के इतिहास में नहीं हुआ है कि इस तरह फंड का इस्तेमाल किया जाये और कानून भी इसकी इजाजत नहीं देता है. उन्होंने बताया कि टाटा वर्कर्स यूनियन के आंतरिक कर्मचारियों का हाल ही में वेज रिवीजन समझौता हुआ है. यूनियन मजदूरों के चंदा से चलता है. इस चंदा के आने और हर महिने का खर्च एक बराबर हो चुका है. इसके अलावा बैंक से जो ब्याज पहले ज्यादा मिलता था, वह भी घट गया है. ऊपर से टाटा वर्कर्स यूनियन के सौ साल पूरे होने पर कर्मचारियों को गिफ्ट दिया जाना है, जिस पर 2.50 से 3 करोड़ रुपये खर्च होना है. ऐसे में अभी यूनियन के पास भी काफी खर्च है और आमदनी काफी कम है. वैसे भी कई कमेटी मेंबरों ने इस पर अपनी लिखित आपत्ति जता दी है, जिसमें कानूनी दायरा के बाहर जाकर यह राशि खर्च नहीं किया जा सकता है. इस पर अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने भी सकारात्मक पहल की और बताया कि उनके पास भी कई आपत्तियां आयी है. महामंत्री जो बोल रहे है, वह सही है. पहले कमेटी मेंबरों के साथ बातचीत होगी, उसके बाद ही किसी तरह का कोई फैसला लिया जा सकता है. सिर्फ अपने स्तर से इतना बड़ा खर्च करने का फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. इस कारण अभी जब तक कमेटी मीटिंग नहीं होती है, तब तक फंड का इस्तेमाल करना है या नहीं, उस पर फैसला नहीं लिया जा सकता है. कमेटी मीटिंग के बाद ही कोई जरूरत होगी तो फैसला लिया जायेगा क्योंकि कोरोना वायरस का असर अभी काफी लंबा समय तक चल सकता है. इस कारण इस पर बाद में भी जरूरत होगी तो फैसला लिया जायेगा. इस पूरे प्रकरण में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद और महामंत्री सतीश सिंह एकसाथ नजर आये और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय अलग-थलग पड़ते हुए नजर आये. इस बीच सतीश सिंह का पक्ष इसलिए भी भारी पड़ा क्योंकि पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट संजीव चौधरी टुन्नु का भी उनको पूरा साथ मिला, जिसके बाद खुद अध्यक्ष आर रवि प्रसाद भी दबाव में आये. वैसे कई कमेटी मेंबरों ने भी इसका विरोध किया था, जिसके बाद अध्यक्ष और महामंत्री ने संयुक्त रुप से इस फैसले को फिलहाल के लिए टाल दिया.





