जमशेदपुर : जमशेदपुर के धालभूमगढ़ में बनने वाले एयरपोर्ट का सपना अब चकनाचूर हो गया है. अब यह एयरपोर्ट नहीं बनेगा. यह जानकारी देश के नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दी है. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को एक पत्र लिखकर उन्होंने जमशेदपुर के एयरपोर्ट बनाने की स्थिति की जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि भारत सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (उड़ान) के तहत जमशेदपुर में टाटा स्टील के स्वामित्व वाले सोनारी हवाई अड्डा से 31 जनवरी से शिड्यूल उड़ान संचालन शुरू हो चुका है. इसके अलावा धालभूमगढ़ हवाई अड्डा द्वितीय विश्व युद्ध का एक बेकार पड़ा हुआ हवाई क्षेत्र है. इस हवाई अड्डे पर दो रनवे हैं, जो कि वर्तमान में जर्जर में है और संचालन के लिए उपयुक्त नहीं है. नागरिक उड्डयन मंत्री ने बताया है कि धालभूमगढ़ एयरपोर्ट लिमिटेड कंपनी को 21 जून 2019 को झारखंड में हवाई अड्डे के विकास के लिए संयुक्त उद्यम कंपनी के रुप में बनाया गया था.(नीचे भी पढ़े)
इसके लिए राज्य सरकार को हवाई अड्डे के विकास के लिए भारतीय विमानपतन प्राधिकरण को सभी भारमुक्त भूमि उपलब्ध करानी थी. भारतीय विमानपतन प्राधिकरण को राज्य सरकार द्रारा आवश्यक भूमि सौंपने के बाद हवाई अड्डे का विकास करना था और अन्य क्षेत्र को राज्य सरकार द्वारा विकसित किया जाना था. यह बताया गया कि पर्यावरण मूल्यांकन समिति ने देखा कि प्रस्तावित स्थल जंगलों में पड़ता है, जो बड़ी संख्या में हाथियों का निवास स्थान है और हाथी गलियारे के रुप में जाना जाता है और 25 सितंबर 2020 की बैठक में यह फैसला लिया गया कि प्रस्तावित स्थल हवाई अड्डे के विकास के लिए उपयुक्त नहीं है. समिति वर्तणान स्थल चयन से सहमति नहीं थी और परियोजना के प्रस्तावक को एक वैकल्पिक स्थल का पता लगाने के लिए कहा गया. राज्य सरकार द्वारा भारतीय विमानपतन प्राधिकरण को कोई जमीन नहीं सौंपी गयी है और राज्य सरकार द्वारा वन मंजूरी अभी प्राप्त की जानी है. (नीचे भी पढ़े)
साइट पर कोई विकास कार्य अभी तक शुरु नहीं हुआ है. केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि इन सारी बातों को ध्यान में रखेत हुए धालभूमगढ़ एयरपोर्ट लिमिटेड को बंद करने का फैसला लिया गया है और राज्य सरकार को 23 दिसंबर को पत्र भेजा गया है. इसका अब तक उत्तर नहीं मिला है. यह बताया गया है कि अभी कोई नया एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव नही है क्योंकि जमीन उपलब्ध नही है. आपको बता दें कि जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो लगातार एयरपोर्ट बनाने को लेकर केंद्र सरकार द्वारा दबाव बनाया जा रहा था. इसके अलावा काफी दिनों से डिमांड चल रहा था. वहां एयरपोर्ट बनना था, जिसको लेकर लोगों ने भी काफी निवेश वहां कर रखा है. ऐसे लोगों का सपना चकनाचूर हो गया है.



