
जमशेदपुर : महानायक वीर शहीद सिदो मुर्मू के वंशजों के अपमान, अन्याय और असुरक्षा के लिए झामुमो और सोरेन परिवार पूरी तरह से दोषी है। बरहेट विधानसभा से खुद एमएलए और झारखंड के मुख्यमंत्री होने के बाद भी रामेश्वर मुर्मू की संदिग्ध हत्या पर चुप्पी, वंशजों से नहीं मिलना, पूरे हत्या प्रकरण को रफा-दफा करने की कोशिश और 2016 में भी इन शहीदों के वंशजों पर भोगनाडीह में जानलेवा आक्रमण और तब भी चुप्पी साधना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह बात पूर्व सांसद, आदिवासी सेंगेल अभियान (एएसए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इसके पीछे वोट बैंक, सत्ता- सुख और स्वार्थ का खेल है। बीजेपी के डर से जहां मुसलमान और ईसाई झामुमो को साथ देने के लिए मजबूर हैं, तो झामुमो के लिए उनकी मजबूरी इनका तोहफा बन जाता है। अन्ततः धार्मिक गठजोड़ की सजा सरना आदिवासियों को भुगतनी पड़ रही है। रामेश्वर मुर्मू इसी वोट बैंक की बलि चढ़ गये हैं। श्री मुर्मू ने कहा कि झामुमो के द्वारा आगे भी सुधार और सुरक्षा की कोई गुंजाइश नहीं है। इसीलिए झामुमो सरना धर्म कोड, संताली राजभाषा, झारखंडी डोमिसाइल, शराबबंदी आदि गंभीर मुद्दों पर भी चुप रहती है।
उन्होंने कहा कि रामेश्वर मुर्मू प्रकरण पर पूरे देश के आदिवासी शहीद वंशजों के साथ मर्माहित हैं, आक्रोशित हैं। अतः सरना आदिवासी विरोधी हेमंत सोरेन को नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा दे देना उचित है। रामेश्वर मुर्मू प्रकरण के प्रतिरोध में झारखंड, बंगाल, ओडिशा, असम, बिहार में आदिवासी सेंगेल अभियान (एएसए) और अनेक संगठनों के द्वारा 30 जून-हूल दिवस को विरोध दिवस के रूप में मनाया जाएगा। माला और मेला की नौटंकी की जगह हूल-शपथ ली जायेगी। तत्पश्चात 7 जुलाई को फिर 5 राज्यों के गांव-गांव में विरोध जन-जागरण कार्यक्रम किये जाएंगे।
सालखन मुर्मू ने कहा कि 12 जनवरी 2017 को भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग की गई थी कि सिदो मुर्मू और बिरसा मुंडा के वंशजों को जीवनपर्यंत सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार की तरफ से उचित व्यवस्था की जाए। राष्ट्रपति कार्यालय के निर्देश के बावजूद अब तक कुछ नहीं हुआ है। अतः हमारी मांग है कि दोनों वंशजों के लिए एक-एक ट्रस्ट का गठन किया जाए और उस ट्रस्ट में कम से कम एक सौ करोड़ रुपयों की राशि फिक्स डिपाजिट (कॉरपस कैपिटल) के तौर पर रखा जाए, जो उनके हितों के लिए खुद उनके द्वारा संचालित हो सके। श्री मुर्मू ने कहा कि सीएनटी / एसपीटी कानून देने वाले वंशजों का इतना हक तो बनता है।







