
चाईबासा : जिला कांग्रेस पश्चिम सिंहभूम के तत्वावधान में बुधवार को कांग्रेस भवन में अंतर्राष्ट्रीय शांति नोबेल पुरस्कार एवं भारत रत्न मदर टेरेसा की जयंती मनाई गई. देश हित में किए गए उनके कार्यों को याद किया उनके बताए मार्ग पर चलने का लिया संकल्प. मदर टेरेसा के चित्र पर माल्यार्पण कर मोमबत्ती रोशन कर पुष्प अर्पित किए. वक्ताओं ने जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार एवं भारत रत्न मदर टेरेसा समाज को नई दिशा देने वाली और गरीबों, अनाथों, असहायों के दुख दर्द के लिए जीने वाली प्रेम, दया, करुणा की प्रति मूर्ति थीं. 9 सितंबर 2016 को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत घोषित किया था. 26 अगस्त 1910 को स्कॉरजे (मेसीडोनिया) में उनका जन्म हुआ. उनके पिता निकोला बोयाजू का तब निधन हो गया जब वह आठ वर्ष की थीं. उनकी मां द्राना बोयाजू ने उनका पालन पोषण किया. उन्होंने बचपन से ही गरीबी का दौर देखा. उन्होंने शिक्षा प्राप्त करते हुए 12 वर्ष की आयु में संकल्प लिया कि वह अपना जीवन दूसरों की सेवा में लगाएंगी और 18 वर्ष की आयु में सिस्ट ऑफ लोरेटो में शामिल हुईं. एक बार वह भारत घूमने आयीं और उनके मन में भारत के गरीबों को देख कर सेवा का भाव उभरा. इसके बाद वह कोलकाता में आ गयीं और दूसरों की सेवा करते हुए 1948 में भारत की नागरिकता ले ली थी. 1950 में उन्होंने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की. 1962 में भारत ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया और 1979 में मानव कल्याण कार्य हेतु उन्हें अंतर्राष्ट्रीय नोबेल शांति पुरुस्कार से नवाजा गया. जिसमें एक लाख 92 हजार डॉलर दिए गए. पांच सितंबर 1997 को उन्होंने अंतिम सांस ली. मौके पर कार्यकारी जिलाध्यक्ष रंजन बोयपाई , नगर अध्यक्ष मुकेश कुमार , बबलू कुमार रजक , सांसद प्रतिनिधि त्रिशानु राय , राकेश सिंह ,जितेन्द्र नाथ ओझा , शंकर बिरुली , सेवादल मुख्य संगठक लक्ष्मण हांसदा , ओबीसी विभाग अध्यक्ष चंद्रशेखर दास , जेनाराम सिंकु , केदार कालिंदी , सिकुर गोप , मो.असलम , कार्यालय सचिव सुशील दास आदि उपस्थित रहे.







