रामगोपाल जेना/चाईबासा : जिले में सरकारी योजनाओं को लंबे समय से लंबित रखने वाले संवेदकों पर अब कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है. निविदा निष्पादन से पहले विभिन्न कार्यकारी एजेंसियों से संवेदकों के लंबित कार्यों की रिपोर्ट तलब की जा रही है. जिला प्रशासन के कड़े रुख के बाद संबंधित एजेंसियों में भी हलचल तेज हो गई है. जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन कार्यक्रम के कार्यपालक अभियंता के साथ-साथ ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल एवं अन्य कार्यकारी एजेंसियों से एक-दूसरे के यहां लंबित योजनाओं और संबंधित संवेदकों की जानकारी मांगी जा रही है. पूर्व में उपायुक्त की कार्रवाई के आलोक में निविदा शर्तों में यह प्रावधान किया गया था कि कार्य लंबित रखने वाले संवेदकों को नई योजनाओं का आवंटन नहीं किया जाएगा. इसके लिए संवेदकों से शपथ पत्र भी लिया जाता है. (नीचे भी पढ़ें)
मुख्य अभियंता ने दिए कार्रवाई के निर्देश
सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण विकास विशेष के मुख्य अभियंता अवधेश कुमार ने जिले में लंबे समय से कार्य लंबित रखने वाले बड़े संवेदकों के खिलाफ डिबार की कार्रवाई के लिए कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिए हैं. बताया जा रहा है कि कई योजनाओं में कार्य शुरू होने के बावजूद निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं किया गया. कुछ योजनाएं एक से दो वर्ष बीतने के बाद भी अधूरी बताई जा रही हैं. हालांकि, संबंधित संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई और उनके नामों की आधिकारिक पुष्टि विभागीय स्तर से होना अभी बाकी है. बताया गया कि जिले में डीएमएफटी फंड से संचालित योजनाओं को लंबित रखने वाले संवेदकों पर भी सख्ती की तैयारी है. लंबित योजनाओं का ब्योरा जुटाने के बाद आगामी निविदाओं में संबंधित संवेदकों की स्थिति की जांच की जाएगी. लंबित कार्य पाए जाने पर नई योजनाओं के आवंटन पर रोक लग सकती है. (नीचे भी पढ़ें)
सूत्रों के अनुसार, मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में योजनाएं लंबित होने की बात सामने आ रही है. दावा है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बताए जा रहे एक बड़े संवेदक के पास कई योजनाएं लंबित हैं. हालांकि इस संबंध में भी विभागीय स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यही नहीं, ग्रामीण कार्य विभाग के तहत एमजीएसवाइ और पीएमजीएसवाइ की सड़कों को लंबे समय से लंबित रखने वाले संवेदकों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. विभागीय स्तर पर लंबित कार्यों की स्थिति को निविदा प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे संवेदकों को नई योजनाओं के आवंटन से वंचित किए जाने की संभावना है. (नीचे भी पढ़ें)
जिला प्रशासन के सख्त रुख के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनीतिक पहुंच रखनेवाले बड़े संवेदकों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी. लंबे समय से लंबित योजनाओं को लेकर विभागीय पत्राचार और कार्रवाई की प्रक्रिया चलती रही है, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने के आरोप भी लगते रहे हैं. ऐसे में इस बार लंबित योजनाओं की रिपोर्ट से लेकर डिबार की कार्रवाई तक प्रशासन और विभाग कितना सख्त रुख अपनाते हैं, इस पर सबकी नजर है. यदि नियमों के अनुरूप कार्रवाई हुई तो लंबित योजनाओं वाले संवेदकों के लिए नई सरकारी योजनाओं की निविदा हासिल करना मुश्किल हो सकता है.




