
जमशेदपुर : विश्व आदिवासी दिवस को हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है. इस कड़ी में आदिवासी सेंगेल अभियान भारत के 5 प्रदेशों झारखंड, बिहार, बंगाल, उड़ीसा और असम में “हूल-उलगुलान संकल्प दिवस” के रूप में मनाएगा. 5 प्रमुख मांगों के लिए जगह-जगह धरना व प्रदर्शन के साथ साथ जुलूस, पुतला-दहन आदि कर झारखंड सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका जाएगा. हेमंत सोरेन की सरकार के क्रियाकलाप आदिवासी विरोधी प्रमाणित हो रहे हैं. अतः हेमंत सरकार को चेताने और झारखंडी जन को जगाने के लिए हूल-उलगुलान संकल्प दिवस के रूप में विश्व आदिवासी दिवस का पालन प्रासंगिक है. इनकी मांग है कि अंग्रेजों के खिलाफ संथाल विद्रोह के महानायक वीर शहीद सिदो मुर्मू के वंशज रामेश्वर मुर्मू की हत्या की सीबीआई जांच का अब तक आदेश क्यों नहीं दिया है ?, सरना धर्म कोड की अनुशंसा भारत सरकार को अब तक क्यों नहीं किया है ?, झारखंडी डोमिसाइल (1932) क्यों लागू नहीं किया है ? क्यों भाजपा द्वारा लागू 1985 ही अब तक चालू है ?, संताली को झारखंड की राजभाषा बनाने के मामले पर चुप क्यों हैं ?, शहीद सिदो मुर्मू और शहीद बिरसा मुंडा के वंशजों के लिए दो ट्रस्ट गठन कर प्रत्येक ट्रस्ट को एक सौ करोड़ रूपया देने के मामले पर चुप क्यों हैं ?. इन सारी मांगों को लेकर राज्य सरकार को घेरने की तैयारी की गयी है.






