
हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग में बड़ा हादसा हुआ. हजारीबाग जिले के पेलावल ओपी थाना क्षेत्र के रोमी गांव निवासी 35 वर्षीय रिंकू खान और उसकी पत्नी और उसका एक बच्चा सोया था. हजारीबाग का तापमान काफी कम हो गया था. इस कारण ठंड से बचने के लिए कोयला की अंगेठी जलाकर घर में सारे लोग सो गये थे. इस दौरान ही परिवार के तीन लोगों की दम घुटने से मौत हो गयी. एक व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है. इस घटना के बाद से गांव में मातम का माहौल है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बताया जाता है कि रिंकू खान ने अपना नया घर बनवाया था. सोमवार को गृहप्रवेश का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसके लिए सभी रिश्तेदार भी आ चुके थे. रविवार की रात को काफी ठंड थी. परिवार ने चूल्हा और हीटल जलाकर सो गये थे. चूल्हे से निकलता हुआ धुआं धीरे धीरे पूरे घर में फैल चुका था. इसका पता कमरे में सो रहे लोगों को भी नहीं लग पाया. कमरे से धुआं के निकलने का रास्ता नहीं होने के कारण गैस चेंबर के रुप में कमरा बन गया. सोमवार सुबह जब घर का दरवाजा नहीं खुला तो आसपास के लोगों ने आवाज लगायी. गेट नहीं खुलने पर दरवाजा तोड़ा गया, तब जाकर कमरे से 3 शव बरामत किये गये. एक व्यक्ति की हालत गंभीर है. आपको बता दें कि हजारीबाग में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. इस मामले को लेकर चिकित्सकों की राय ली गयी तो बताया गया कि कोयला जलाने से कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलता है. यह गैस सांस की नली से अंदर जाने के बाद दिमाग में खून की सप्लाइ ही रोक देती है. इस कारण ब्रेन हेम्रेज होता है. कई बार जान चली जाती है. डॉ रंजीत पंडा ने बताया कि ठंड के दिनों में लोग अंगेठी जलाकर सो जाते है, जो खतरनाक है. हवा निकलने का रास्ता हो तो चल जायेगा, नहीं तो यह जानलेवा साबित हो सकता है. चूल्हा जलाने समय घर की खिड़कियां और रोशनदार को खोलकर रखना चाहिए वेंटिलेशन जरूरी है. कार्बन मोनो ऑक्साइज एक जहरीली गैस होती है, जो कोयला या लकड़ी जलने से निकलती है. सांस लेने में दिक्कत पैदा कर देती है. दरअसल खून में मौजूद आरबीसी ऑक्सीजन की तुलना में कार्बन मोनो ऑक्साइड से जुड़ जाती है, जिस कारण खून की सप्लाइ री रुक जाती है और व्यक्ति की मौत हो जाती है.




