
बिनय कुमार सिन्हा
टंडवा : आम्रपाली कोल परियोजना में सालाना 14.50 मिलियन टन से बढाकर 25 मिलियन टन कोल उत्पादन करने के सपनों पर ग्रहण लग गया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के तत्वावधान में आयोजित ग्राम सभा में पांच गांव के रैयत तीखा विरोध करते हुए सीसीएल के विकास, रोजगार, नौकरी, मुआवजा समेत अन्य अधिकारों पर जमकर बरसे। लोकसुनवाई के अध्यक्ष अपर समाहत्र्ता संतोष कुमार सिन्हा की मौजूदगी में जब रैयतों ने 2013 से लेकर अबतक के सफर का सीसीएल के आश्वसनों की पोटली खोला तो अधिकारियों को जमीन के नीचे जमीन खिसक गयी। इस मौके पर प्रदुषण विभाग के संजय श्रीवास्तव,क्षेत्रीय अधिकारी अशोक यादव,जीएम ए के चौबे, सीसीएल के वन पर्यावरण विभाग के जीएम सौमित्र सिंह, प्रमुख सीताराम साव, मुखिया अक्षयवट पांडे, शंकर चौरसिया, गजेन्द्र साव, प्रयाग राम, आशुतोष मिश्रा, संदीप सिंह समेत अन्य शामिल थे। ग्राम सभा शुरू होने से पूर्व सीसीएल ने अबतक के विकास की पोटली खोलते हुए लोगों से सहयोग करने की अपील की। अपर समाहत्र्ता संतोष सिन्हा ने साफ कहा कि इस संबंध में एक रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जायेगी जो अंतिम निर्णय लेगा। इस ग्राम सभा में कुमडांग के बसंत कुमार ने टॉप स्वायल डंपिंग पर सवाल उठाते सीसीएल से पुछा कि वह मिट्टी आज कहां है? सीसीएल की विस्तारीकरण गांव वालों के लाश पर न हो? वहीं संदीप कुमार और आशुतोष मिश्रा ने पुछा कि गांव में स्कूल वाहन तो दिये गये पर स्कूल कहां है,अस्पताल और डॉक्टर कहां है? ग्राम सभा में बिनोद मंडल, अजय कुमार देव, रमेश वर्मा, उज्जवल कुमार, राजेन्द्र प्रसाद, मूलचंद साहू, मनोज राम, मुखिया अक्षयवट पांडे, शंकर चौरसिया, महेश महतो समेत अन्य ने कहा कि उत्पादन का विस्तारीकरण का हमलोग विरोध नहीं कर रहे है पर गांव वालों को विकास भी उतना तेजी से हो। न हमें पीने का पानी मिला न हीं रोजगार और न हीं बिजली मिली। जबकि सीसीएल हमारी जमीन से कोयला निकाल कर हर साल एक हजार करोड़ रूपया मुनाफा कमा रही है। अंत में ग्रामीणों ने एक स्वर में पर्यावरण स्वीकृति का विरोध किया। (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

रैयतों के सुलगते सवालों से ठंढ में भी सीसीएल के छूटे पसीने
आम्रपाली के होन्हे में लम्बे समय बाद पोटा केबिन में पांच गांव के रैयतों के बीच जिला प्रशासन ने लोकसुनवाई सह ग्राम सभा का आयोजन करवाया गया। जनता की अदालत में अधिकारी से लेकर सीसीएल के सारे अधिकारी मौजूद तबतक रहे जबतक इसका समापन नहीं हुआ। इस सभा में काफी समय बाद गांव वालों के सुलगते सवालों से सीसीएल के अधिकारियों के ठंढ में भी पसीने छुटते रहे। पिछले चार साल का गुस्सा लबों से फुटता रहा। जमीन के बदले नौकरी,मुआवजा,रोजगार और विकास संबंधी सवाल प्रबंधन को कांटों की तरह चुभते रहे। कुमडांंग के संदीप कुमार ने गांव की पीड़ा उठाते हुए कहा कि गांव वालों को उग्रवाद के नाम पर जेल भेजा गया,बंदूक को लेकर उग्रवादी किसी के घर बाजबरन घुसे तो पुलिस कुछ को उग्रवादी समर्थक बनाकर तिहाड़ जेल भेज दी। बसंत साव और बिनोद मंडल ने सीसीएल से पुछा कि हैवी ब्लास्टिंग का कुछ तो पैमाना होगा,कुछ समय निर्धारित होगा। आपकी जब चाहत हो चार सौ हॉल करके ब्लास्ट कर दिये। आपको पता है कि गांव के घरों में कितनी दरारें आयी। मुखिया अक्षयवट पांडे ने जिला प्रशासन से पुछा कि डीएमफटी फंड के 700 करोड़ रू आज गांवों में खर्च होते तो गांव वालों का विकास होता। मनवाटोंगरी के मनोज राम ने कहा कि हमलोगों का 30 घर है जिसे पीओ हर बार हटाने की धमकी देते हैं। पर मुझे बसायेंगे कहां यह बताते नहीं? प्रमुख सीताराम साव ने सीसीएल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि गुपचुप तरीके से लोकसुनवाई करायी गयी। न तो गांव में ढाक पिटवाये गये और न हीं अखबारों के माध्यम से गांव वालों की सूचना दी गई। आम्रपाली के पांच गांव पर सेरनदाग और हेचाबलिया और पोकला गांव के लोगों ने तीखा विरोध किया। मुखिया शंकर चौरसिया ने साफ कहा कि बंदोबस्त लैंड पर जबतक नोकरी नहीं मिलेगी तबतक लोगों का विकास नहीं होगा। वही आशुतोष मिश्रा ने सवाल उठाया कि सीसीएल नौ लाख प्रति एकड़ मुआवजा दे रही है जबकि टंडवा में नौ लाख कट्ठा जमीन नहीं मिल रहा है। कार्यक्रम से पूर्व अपर समाहत्र्ता ने साफ कहा कि सीसीएल जो बोलती है वह जमीन पर दिखना भी चाहिए। (आगे की खबर नीचे पढ़ें)
हर माह रैयतों को मिलेगा 2 हजार से तीन हजार एन्युटी : जीएम
आम्रपाली जीएम ने रैयतों के सवालों का जबाब देते हुए कहा कि सीसीएल भी अब रैयतों को हर माह दो से तीन हजार एन्युटी का लाभ देगी। उन्होंने कहा कि एक डीसमिल पर 150 रू का भुगतान होगा,जिसका अवधि 30 साल या जबतक परियोजना रहेगा। जीएम ने माना कि जमीन के बदले मुआवजा दर कम है इसका शीघ्र ही एक संशोधन प्रस्ताव सीएमडी ऑफिस को भेजा जायेगा। जीएम ने यह भी जोड़ा कि होन्हें में 650 करोड़ का जो टाउनशिप बनेगा उसमें डीएवी स्कूल और अस्पताल भी शामिल है। साथ हीं यह भी कहा कि हमारे कार्यकाल में एक भी मुकदमा थाने में दर्ज नहीं हुआ।







