
रांची : झारखंड के व्यापारियों और उद्यमियों की संस्था फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज की एक बैठक बुधवार को प्रदूषण बोर्ड के चेयरमेन एके रस्तोगी के साथ संपन्न हुई. वार्ता के क्रम में चेयरमेन श्री रस्तोगी ने अवगत कराया कि 20 हजार स्कवॉयर मीटर जैसे बड़े भवनों एवं उससे ऊपर के भवनों को पर्यावरणीय क्लियरेंस लेना अनिवार्य है. नये भवन जो बन रहे हैं, वे निर्माण के आरंभ से पूर्व क्लियरेंस ले ही रहे हैं किंतु पुराने निर्मित भवनों को भी तुरंत पर्यावरणनीय क्लियरेंस ले लेना है. यह भी बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के आलोक में 1 जुलाई से झारखण्ड समेत पूरे देश में प्लास्टिक और थर्मोकोल के कई चीजों का प्रयोग प्रतिबंधित किया जायेगा. इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी. वार्ता के क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि सभी श्रेणियों के होटल को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से दो माह के अंदर कन्सेंट टू इस्टेबलिसमेंट/कंसेट टू ऑपरेट प्राप्त करना अनिवार्य है अन्यथा उन पर कार्रवाई आरंभ की जायेगी. यह प्रावधान सभी क्लबों और बैंक्वेट हॉल, कन्वेंशन सेंटर, अस्पताल व शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी लागू होता है जो उपर्युक्त क्षमता का अपशिष्ट जल उत्पन्न करते हैं. वार्ता के क्रम में चैंबर ने बोर्ड में लंबित सीटीओ या सीटीई के आवेदनों के त्वरित निपटारे के साथ ही सीटीओ रद्द होने की स्थिति में इसके विरूद्ध अपील हेतु अपीलेट ट्रिब्यूनल की नियमित सुनवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया. बैठक के दौरान चैंबर ने बोर्ड के नये नियम या प्रावधानों से अवगत कराने हेतु नियमित तौर पर जागरूकता कार्यशालाओं के आयोजन पर भी वार्ता की. प्रतिनिधिमण्डल में चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा, महासचिव राहुल मारू, पूर्व अध्यक्ष रंजीत गाडोदिया, दीपक कुमार मारू के अलावा जेसिया के पदाधिकारी सम्मिलित थे.






