कुमारी अंजलि की रिपोर्ट
जमशेदपुर : जमशेदपुर के कदमा शास्त्रीनगर में हुई हिंसा के मामले में वैसे तो काफी राजनीतिक माहौल गर्म हो चुका है, लेकिन इस पूरे मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुबर दास की भूमिका संदेह के घेरे में भी है. आखिर किस तरह पार्टी में गुटबाजी है, यह भी खुलकर सामने आ चुका है. 11 अप्रैल को कदमा हिंसा के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता अभय सिंह समेत कई भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी हुई. कई हिंदूवादी नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया. लेकिन रहस्यमय तरीके से इस पूरे मामले में कोई ठोस कदम या कोई ठोस बयान अब तक रघुबर दास का नहीं आया है. उनका बयान सिर्फ इतना था कि निर्दोष को पुलिस जेल ना भेजे और जो दोषी है, उन पर कार्रवाई हो. लेकिन अपने नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर अब तक उन्होंने कुछ नहीं बोला या किया है. अभय सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनसे मिलने के लिए राज्य के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी करीब 150 किलोमीटर की दूरी कर आ गये. रांची से चलकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश आ गये. पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा भी आकर जेल में जाकर अभय सिंह से मिल चुके है. विधायक सरयू राय भाजपा से अलग होकर भी अभय सिंह के पास गये, लेकिन अब तक सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास का ना तो अभय सिंह और भाजपा और हिंदूवादी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर कोई बयान आया है और ना ही वे लोगों से मिलने तक गये. यहीं नहीं, रघुबर दास लगातार जमशेदपुर में रहकर भी वे अभय सिंह और अन्य भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध करना नहीं चाहे और ना ही वे मिलने ही गये, जो चर्चा का विषय बना हुआ है. (नीचे भी पढ़ें)

जब बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा का विलय भाजपा में किया था, तब अभय सिंह भी भाजपा में आ गये थे. हालांकि, पहले अभय सिंह का पूर्व सीएम रघुबर दास से कभी पटरी नहीं खायी, लेकिन जब फिर से भाजपा में अभय सिंह आये तो वे खुद पूर्व सीएम रघुबर दास से मिलने के लिए गये. इसके बाद वे हमेशा रघुबर दास के साथ ही रहे और अभय सिंह ने जमशेदपुर पूर्वी से चुनाव जीतने वाले सरयू राय का विरोध किया और उनके खिलाफ काफी प्रेस कांफ्रेंस भी किया. लेकिन सबसे संकट के समय ऐसे हालात हुए कि रघुबर दास तो अभय सिंह के पास नहीं आये, अलबत्ता जब भाजपा के नेता भी कन्नी काट रहे थे तो सरयू राय ने उनका साथ दिया और खुद बिष्टुपुर थाना जाकर अभय सिंह को तत्कालिक सहानुभूति जताया और मदद पहुंचायी. रघुबर दास के साथ क्या अभय सिंह का फिर नहीं बन रहा है या रघुबर दास की राहें अलग हो चुकी है क्योंकि पूरी भाजपा अभय सिंह और कदमा शास्त्रीनगर मामले में एक साथ ही है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर रघुबर दास कहां और क्यों गायब हो गये है. इसको लेकर कयास का दौर एक बार फिर से शुरू हो चुका है. हालांकि, पूर्व सीएम रघुबर दास के मामले में पूछे गये सवाल पर पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जो दो किलोमीटर की दूरी से नहीं आया, वे खुद इस पर जवाब दे सकते है. (नीचे देखे पूरी खबर)
बन्ना गुप्ता कदमा शास्त्रीनगर के प्रकरण में चुप रहकर राजनीतिक नफा नुकसान देख रहे
कांग्रेस के कोल्हान के दूसरे विधायक और मंत्री बन्ना गुप्ता के अपने विधानसभा क्षेत्र और गृह क्षेत्र कदमा में हिंसा हो गयी. इस मामले में दो समुदाय के बीच विवाद हो गया. लेकिन इस मामले में अब तक विधायक बन्ना गुप्ता का कोई बयान तक नहीं आया है. वे किसी भी समुदाय या किसी से मिलने तक नहीं गये है. उनकी चुप्पी भी रहस्यमयी बनी हुई है. हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बन्ना गुप्ता अपने राजनीतिक नफा नुकसान का आकलन कर इस मामले में अपने को दूर रखे हुए है. दरअसल, कांग्रेस के नाते और खुद मंत्री बन्ना गुप्ता का मुसलिम समुदाय में अच्छी पकड़ है और उनको वोट भी मुसलिम समुदाय खुलकर देता आया है. ऐसे में वे नहीं चाहेंगे कि उस वर्ग को नाराज करें. वहीं, बन्ना गुप्ता ने हाल ही में अपनी छवि हिंदूवादी के रुप में बनाने की कोशिश की थी. ऐसे में यह उम्मीद जतायी जा रही थी कि बन्ना गुप्ता इस मामले में बीच का रास्ता खुद निकालते, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. वे हिंदू समाज से भी दूरी बनाकर रखे. घर के पास ही यह कांड होता रहा, लेकिन वे अब तक चुप ही है. ऐसे में मंत्री बन्ना गुप्ता के हिंदूवादी छवि बनाने की कोशिश को भी बड़ा झटका इस कांड से लगा है.



