जमशेदपुर : जमशेदपुर के मानगो डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल में रविवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई. कार्यालय और ओपीडी बंद रहने के बावजूद इमरजेंसी एवं वार्डों में नियमित चिकित्सा सेवा जारी रखने का प्रावधान है, लेकिन मेडिसिन वार्ड में कई घंटों तक डॉक्टर और नर्स के अनुपस्थित रहने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. जानकारी के अनुसार, मेडिसिन वार्ड के बेड संख्या 474 पर भर्ती जयदेव गोराई को रक्त चढ़ाया जाना था. इसके लिए रक्त का नमूना लिया जाना आवश्यक था और रक्तदाता भी अस्पताल पहुंच चुका था. परिजनों का आरोप है कि सुबह करीब 11:30 बजे से दोपहर 2:45 बजे तक वार्ड में कोई नर्स मौजूद नहीं थी. वहीं डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण जरूरी चिकित्सीय प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी. मरीज के परिजन कान्हाई गोराई ने बताया कि इस दौरान मरीज ने भोजन के बाद उल्टी भी की, लेकिन उसकी जानकारी देने और आवश्यक सहायता प्राप्त करने के लिए वार्ड में कोई स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं था. (नीचे देखे पूरी खबर)

मदद की तलाश में वे इमरजेंसी विभाग तक पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि वार्ड के डॉक्टर ऊपर आते हैं और इमरजेंसी में उपलब्ध नहीं रहते. स्थिति से नाराज मरीजों के परिजनों ने वार्ड में हंगामा किया और जिला प्रशासन से शिकायत करने की चेतावनी दी. सूचना मिलने पर सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराया. इसके बाद संबंधित चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ से संपर्क किया गया. परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब 2:45 बजे एक नर्स वार्ड में पहुंची, जबकि शाम लगभग 5 बजे जूनियर डॉक्टर धीरज पहुंचे. डॉक्टर ने बताया कि वे इमरजेंसी में व्यस्त थे. हालांकि परिजनों का कहना है कि चार घंटे तक स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति किसी भी गंभीर मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी. वार्ड में मौजूद अन्य मरीजों और उनके परिजनों ने भी अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना था कि मेडिसिन वार्ड अधीक्षक डॉ. बलराम झा का कार्यालय नजदीक होने के बावजूद ऐसी स्थिति बनी रही. इससे अस्पताल के अन्य वार्डों की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. मौके पर पहुंची नर्स ने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया. उनके पास नेम प्लेट भी नहीं लगी थी. नर्स का कहना था कि रविवार को पूरे विभाग में केवल तीन नर्सों की ड्यूटी थी और वे एक मरीज को शिफ्ट करने के लिए इमरजेंसी गई हुई थीं. परिजनों का कहना है कि कारण चाहे जो भी हो, अस्पताल में भर्ती मरीजों को समय पर इलाज और निगरानी उपलब्ध कराना अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है. उनका आरोप है कि छुट्टी के दिनों में अस्पताल की व्यवस्था भगवान भरोसे चलती है और मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है. अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.





