जमशेदपुर : मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप का असर अब कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम अस्पताल पर साफ दिखाई देने लगा है. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण इमरजेंसी वार्ड में बेड की भारी कमी हो गई है. हालात ऐसे हैं कि कई गंभीर मरीजों का इलाज फर्श पर लिटाकर करना पड़ रहा है, जबकि कुछ मरीजों को कुर्सी पर बैठाकर ही सलाइन चढ़ाई जा रही है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती तो कर लिया जाता है, लेकिन बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. (नीचे भी पढ़ें)

पोटका निवासी विजय सरदार ने बताया कि पिछले दो दिनों से उन्हें तेज बुखार, सर्दी और खांसी की शिकायत थी. सोमवार सुबह इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने भर्ती करने की सलाह दी. लेकिन बेड नहीं मिलने के कारण उन्हें कुर्सी पर बैठाकर ही सलाइन चढ़ाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जब अस्पताल कर्मियों से बेड के बारे में पूछा गया तो जवाब मिला कि “बेड खाली होने पर दे दिया जाएगा.” (नीचे भी पढ़ें)
वहीं, पटमदा के नूतनडीह निवासी शुरू उरांव ने बताया कि पिछले तीन दिनों से सर्दी और खांसी की समस्या थी. दवा खाने के बावजूद आराम नहीं मिला. वह ठेकेदारी का काम करती हैं. मंगलवार सुबह दवा खाकर काम पर गई थीं, लेकिन अचानक उल्टी होने लगी और तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. इसके बाद परिजन उन्हें एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने जांच के बाद भर्ती तो कर लिया, लेकिन बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें इमरजेंसी वार्ड के फर्श पर लिटाकर सलाइन चढ़ाया जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
अस्पताल में बढ़ती भीड़ का मुख्य कारण इन दिनों वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, डायरिया और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को माना जा रहा है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इमरजेंसी पहुंच रहे हैं, जिससे अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है. मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकार और अस्पताल प्रबंधन को तत्काल अतिरिक्त बेड और संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके और उन्हें फर्श पर इलाज कराने जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े. वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गई है. बेड खाली होते ही मरीजों को उपलब्ध कराया जा रहा है और सभी मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है.




