जमशेदपुर : जुगसलाई स्थित श्री राजस्थान शिवमंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन आज सर्वप्रथम श्री लक्षमीनारायण मंदिर में विनय कांत त्रिपाठी का सान्निध्य में छीतरमल धूत एवं राजकुमार दोदराजका ने सपत्नीक श्रीमद्भागवत का पूजन संपन्न कराया. इस पूजा में अन्य भक्तों ने भी हिस्सा लिया. पूजन के पश्चात श्री राधा गोविन्द का संकिर्तन करते हुए भक्त श्रीमद्भागवत महापुराण को अपने सिर पर रख कर ब्यासपीठ तक लाए एवं वहां विराजमान कराया. श्रीमद्भागवत की आरती के पश्चात श्री राजस्थान शिवमंदिर कमेटी के अध्यक्ष छीतरमल धूत, अरुण अग्रवाल, एवं दीपक रामुका ने ब्यासपीठ का सम्मान किया. (नीचे भी पढ़ें)

श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन आज प्रवचनकर्ता विनय कांत त्रिपाठी ने कहा कि पितृपक्ष में किये गए धार्मिक अनुष्ठानों का फल हमारे पितृवंश को प्राप्त होता है. पितरों की पूजा से वंश-वृद्धि एवं अनेक प्रायोजनो में सफलता मिलती है. आचार्य त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कोई पोथी नहीं, यह भगवान् श्री विष्णु का साक्षात रूप है. भागवत कथा कोई पैसा नहीं, अपितु यह साक्षात भगवान् श्री हरि की कृपा है. कथा के क्रम में आचार्य विनय कांत त्रिपाठी ने ब्यासपीठ से पद्मपुराण का संदर्भ देते हुए श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य विस्तार से समझाया. (नीचे भी पढ़ें)
श्रीमद्भागवत कथा क्या है, इसका हम क्यों श्रवण करते हैं, इसके क्या फल हैं, उन्होंने इस संबंध में भी विस्तार से चर्चा की. आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में चमक बनाये रखने के लिए लगातार श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते रहना चाहिए, संसार सागर को पार करने का एकमात्र साधन श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण है, कथा श्रवण करने से बड़ा कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं है. पितृपक्ष में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण तो अत्यंत ही फलदायी माना जाता है. श्रीमद्भागवत कथा का पूरा नाम श्रीमद्भागवत कथा तिलकम् है, इस का कहीं भी संकल्प लेकर कहीं भी कथा आयोजन किया जा सकता है. मनुष्य जीवन के सात सुखों के बारे में भी बताया गया, सबसे बड़ा सुखी वही है जो भगवान् का दास है. आचार्य जी ने श्री वृंदावन धाम, श्री राधेरानी और भगवान् श्रीकृष्ण के महत्व की भी चर्चा की. (नीचे भी पढ़ें)
कथा के अन्तर्गत आज भगवान श्री बांकेबिहारी जी की सुंदर झांकी की भी प्रस्तुति की गई. आज की कथा में पवन काबरा, सांवरलाल शर्मा, विश्वनाथ शर्मा, सुशील सर्वा, गोवर्धन गुप्ता, कमल किशोर अग्रवाल, मनोज केडिया, संजय गुप्ता सक्रिय रहे. वहीं अन्य उपस्तिथ श्रद्धालुओं में किरणा भाउका, मुरलीधर शर्मा, गिरधारीलाल शर्मा, नथमल शर्मा, कमल अग्रवाल, पुरुषोत्तम सरायवाला आदि समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल रहे.







