जमशेदपुर : जमशेदपुर के कदमा स्थित जुस्को स्कूल की आठ छात्राओं ने शिक्षिका आकांक्षा सिंह के साथ संस्था शिवम शिल्प कला केंद्र का भ्रमण किया. इस दौरान छात्राओं ने संस्था की अध्यक्ष मधु सिंह से मुलाकात कर महिलाओं के सशक्तिकरण, कौशल विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक कार्यों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की. भ्रमण के दौरान संस्था की अध्यक्ष मधु सिंह ने बताया कि शिवम शिल्प कला केंद्र महिलाओं को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है. संस्था की ओर से मिट्टी से उपयोगी एवं सजावटी वस्तुएँ बनाना, मिलेट्स से पौष्टिक खाद्य पदार्थ तैयार करना, सिलाई, जूट एवं कपड़े से हस्तनिर्मित वस्तुएं बनाना, गिफ्ट पैकेजिंग और डेकोरेशन जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है. इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है. (नीचे भी पढ़ें)

इसके साथ ही संस्था पर्यावरण संरक्षण एवं स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है. विद्यालय के विद्यार्थियों आयशा मिर्ज़ा, रोहन मिश्रा, अयान खान, द्युमणि चौधरी एवं शेख मोहम्मद ने हस्तनिर्मित वस्तुओं को बनाने की प्रक्रिया को नजदीक से समझा और स्वयं अपने हाथों से वस्तुएं बनाकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया. विद्यार्थियों ने संस्था के कार्यों में रुचि दिखाते हुए भविष्य में स्वयंसेवक के रूप में जुड़कर सामाजिक गतिविधियों में सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की. इस अवसर पर संस्था की कोर टीम की सदस्य ममता सिंह ने मिशन इंडिया के विजन की जानकारी दी और सामाजिक विकास एवं जनसेवा के महत्व पर प्रकाश डाला. संस्था की सदस्य माधुरी देवी, हर्षा कुमारी, सुमन, रुनू एवं सरिता ने शिक्षिका आकांक्षा सिंह और विद्यार्थियों का स्वागत किया. (नीचे भी पढ़ें)
संस्था की अध्यक्ष मधु सिंह ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि समाज के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव की शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बच्चों के लिए आयोजित होने वाली कार्यशालाओं में भाग लेने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया. इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और रोजगार की अवधारणा से परिचित कराने के साथ-साथ उनमें समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता विकसित करना था.




