
दिल्ली/जमशेदपुर : टाटा समूह को शुक्रवार को बड़ी जीत मिली. देश की सर्वोच्च न्यायालय में सायरस मिस्त्री के मसले पर चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने फैसला सुनाया. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें सायरस मिस्त्री को दोबारा टाटा समूह का चेयरमैन बहाल करने का आदेश दिया गया था इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि चेयरमैन के पद से सायरस मिस्त्री को हटाना सही कदम था. न्यायालय ने यह भी अपने आदेश में कहा है कि टाटा समूह और मिस्त्री परिवार के बीच शेयर का जो मामला है, उस मसले को दोनों समूह मिलकर आपस में सुलझा लें. आपको बता दें कि एनसीएलएटी (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण) ने अपने आदेश में सायरस मिस्त्री को टाटा समूह के चेयरमैन के पद से हटाने को गलत ठहराते हुए तत्काल प्रभाव से उनको चेयरमैन के पद पर बहाल करने का आदेश दिया था. एनसीएलएटी के इस फैसले को टाटा समूह और रतन टाटा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस मसले पर जनवरी 2020 से सुनवाई चल रही थी. करीब 12 माह तक सुनवाई होने के बाद 17 दिसंबर 2020 को न्यायालय ने इस मामले में अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था. इसके बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. इस फैसले में टाटा समूह के चेयरमैन के पद से सायरस मिस्त्री को हटाने को सही ठहराया गया और एनसीएलएटी के आदेश को खारिज कर दिया.
2012 में सायरस मिस्त्री को रतन टाटा ने दिया था अपना स्थान, करने लगे थे मनमानी
टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा ने वर्ष 2012 में अपने रिटायरमेंट का ऐलान करते हुए सायरस मिस्त्री को चेयरमैन बनाया था. लेकिन सायरस मिस्त्री मनमानी करने ल गे थे. करीब चार साल के बाद 24 अक्तूबर 2016 को उनको टाटा समूह के चेयरमैन के पद से बरखास्त कर दिया गया था और वर्ष 2017 में एन चंद्रशेखरन को नया चेयरमैन नियुक्त किया गया था. इसके खिलाफ सायरस मिस्त्री ए़सीएलएडी गये थे, जहां एनसीएलएटी ने उनको हटाने को गलत करार दिया था और सायरस मिस्त्री को फिर से बहाल करने का आदेश दिया था. इस मसले के खिलाफ टाटा समूह सुप्रीम कोर्ट गयी और रतन टाटा ने भी इसको लेकर याचिका दायर की. आपको बता दें कि टाटा समूह में टाटा ट्रस्ट के 66 फीसदी शेयर है और मिस्त्री परिवार का अकेला 18.4 फीसदी शेयर है. वैसे मिस्त्री परिवार ने पहले ही कह चुकी है कि वह टाटा समूह से अलग होना चाहती है और उसके शेयर का पैसा का भुगतान कर दें. इसके बाद से इसका आकलन हो रहा है कि उनका पैसे कैसे दिया जायेगा. वैसे इस मसले पर शापूरजी पालनजी समूह ने न्यायालय में कहा था कि अक्तूबर 2016 को हुई बोर्ड की बैठक में सायरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटाना खूनी खेल और घात लगाकर किया गया, हमला के सामान था. इन आरोप को टाटा समूह ने खारिज करते हुए कहा था कि इसमें कोई भी कदम गलत नहीं उठाया गया है.
रतन टाटा ने ट्विट कर इसकी जानकारी दी और भावुक संदेश लिखा
टाटा संस के एमिरट्स चेयरमैन रतन टाटा ने इस फैसले के बाद अपने ट्विटर हैंडल से इस फैसले की जानकारी दी. रतन टाटा ने लिखा है ”सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मैं सराहना करता हूं और मैं कोर्ट का आभारी भी हूं. यह मामला हार और जीत का नहीं है, टाटा ग्रुप की नैतिकता और अखंडता पर लगातार प्रहार किये गये थे. इस फैसले ने एक बार फिर से टाटा समूह की अखंडता और नैतिकता पर मुहर लगाने का काम किया है. एक बार फिर से न्याय की जीत हुई है और इस फैसले ने न्यायापालिका की निष्पक्षता को और मजबूत किया है.






