अनिल कुमार / बोकारो : बोकारो के उपनगर चास में एक ऐसा स्कूल जहां सुविधाएं नदारद हैं, स्कूल की दीवारें भी दरकने लगी है. इस विद्यालय को मध्य विद्यालय बाउरी टोला के नाम से जाना जाता है. देखा जाए तो स्कूल को पुनः जिर्णोद्धार की जरूरत है. जोरिया में स्थित इस स्कूल में तकरीबन 150 बच्चे विभिन्न कक्षाओं में नामांकित है. जहां आसपास पढ़ने आते हैं. चारों तरफ नालियों का पानी बहता है. बरसात में कौन कहे, सालों भर गंदगी तथा जल-जमाव होता है. उसके दुर्गंध से वहां कुछ पल गुजारना मुश्किल होता है. स्कूल की दीवारें चारों तरफ से गिरी पड़ी हैं. कभी भी भवन धराशाई हो सकता है. किसी दिन यह स्कूल किसी बड़ी घटना का गवाह बन सकता है. (नीचे भी पढ़ें)
स्कूल संसाधनों का निजी उपयोग
स्कूल में लगे चपकलो पर ग्रामीण कपड़े धोते हैं. मवेशियों के तबेले में तब्दील विद्यालय चारागाह बना हुआ है. भवनों का उपयोग कई निजी कार्यों के रूप में जरूरत के अनुसार किया जाता है. लेकिन अधिकारियों की नजर इस तरफ नहीं जाती है.
शौचालय भी उपलब्ध नहीं
यहां छात्र-छात्राओं के लिए न तो शौचालय है और न ही बाथरूम. छोटे-छोटे बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह भी पर्याप्त नहीं है. वैसे ग्राउंड है तो उसमें चारों तरफ ईंटा पत्थर से भरा पड़ा है. आसपास के लोगों के द्वारा स्कूल कैंपस में नहाना, कपड़ा धोना आदि करते हैं. छात्रों को परेशानियों से गुजरना पड़ता है.
संसाधनों की कमी
इस स्कूल में पढ़ाई तो राम भरोसे ही होती है. जिस क्लास रूम में बच्चे पढ़ते हैं उसमें बड़ी-बड़ी दरारें देखी जा सकती हैं. दीवारों की स्थिति यह है कि बड़ी-बड़ी दरारों के कारण हमेशा ही किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है. स्कूल में बच्चों के लिए खेलने का कोई साधन नहीं है. (नीचे भी पढ़ें देखें)
जुआड़ियों के लिए बना सुरक्षित जोन
छत के ऊपर आवारा लड़कों की बैठकबाजी के साथ-साथ जुआ खेला जाता है. शराबियों एवं गंजेडियों के लिए सेफ जोन बना हुआ है.दिन हो या रात यहां शरारती तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है.कोई देखने वाला नही है. ग्रामीणों के भय से स्कूल के शिक्षक कुछ बताने को तैयार नहीं है. सरकार के द्वारा मिड डे मील खाना तो सभी बच्चों को मिल जाता है. पर वह शिक्षा और जागरूकता से वंचित है. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)
क्या कहते हैं बच्चे
क्लास 3 की छात्रा सोनाली कुमारी ने बताया कि स्कूल में किसी तरह का व्यवस्था नहीं है. ना खेलने की जगह है. छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है. ना ही पीने कि पानी की व्यवस्था है. शिक्षक को जो मन करता है पढ़ा कर चल जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)
क्लास 3 का छात्र शुभम् कुमार ने बताया कि हमारे स्कूल में किसी तरह कि कोई व्यवस्था नहीं है. बच्चे खेलने के लिए ईधर उधर जाते है. स्कूल के फिल्ड में चारों तरफ ईटा पत्थर से भरा पड़ा है. शिक्षको की भी कमी है. एक ही विषय को बार बार पढ़ा कर चले जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)
कहते हैं स्कूल के प्राचार्य
प्रधानाचार्य लीलु बाउरी ने बताया कि विधालय जोरिया में है. आस पास का गंदा पानी का तेज धार से आता है. विधालय का बांउड्री भी चारों तरफ से टुटा है. विधालय में जब सरकार के द्वारा फंड आता है तो थोडा थोडा काम कराया जाता है. शोचालाय कि व्यवस्था ज्लद किया जा रहा है.




