
रांची : चंद्रयान-3 को लेकर पूरा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है. हर इंसान बस उस पल का इंतजार कर रहा है, जब चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाएगी. झारखंड के लिए ये पल और भी ज्यादा खास होने वाला है. दरअसल झारखंड के धनबाद के दो बेटे भी चंद्रयान-3 टीम का हिस्सा हैं. इन दोनों के चंद्रयान- 3 का हिस्सा होने की वजह से पूरा झारखड काफी गौरवाान्वित महसूस कर रहा है. सूरज कुमार और भरत कुमार ने अपने अचीवमेंट से पूरे देश का मान बढ़ाया है. सूरज कुमार राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर के 2011 बैच के पूर्ववर्ती छात्र हैं. स्कूल के बाद सूरज ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नालॉजी में दाखिला लिया, जहां भी वे टॉपर रहे. सूरज वर्तमान में इसरो में एसडी के पद पर कार्यरत हैं. वहीं भरत कुमार आईआईटी आईएसएम, धनबाद के 2018 बैच के छात्र रहे हैं. उनकी प्रारांभिक स्कूलिंग केंद्रीय विद्यालय भिलाई से हुई थी.वे बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहते थे. इसके बाद तैयारी कर उन्होनें आइआइटी धनबाद में प्रवेश पाया. दोनों हीं बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके शुरुआती दौर में किए गए संघर्ष और कड़ी मेहनत की बदौलत आज इन्होनें ये मुकाम हांसिल किया है. उनकी इस सफलता से आज पूरा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
शाम 6 बजकर 04 मिनट पर लैंड करेगा चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर. इसको लेकर पूरे देश में लोग काफी उत्साहित नजर आ रहे है. आज भारत का मून मिशन यानी कि ‘चंद्रयान 3’ चांद की सतह पर लैंड करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. बता दें, शाम को चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह पर लैंड करेगा. इसके साथ ही चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने वाला भारत पहला देश बन जाएगा. जानकारी के लिए आपको बता दें, चंद्रयान-3 का लैंडर-रोवर चंद्रमा पर सिर्फ एक दिन ही अपना काम करेगा. चांद का एक दिन, पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है. भारत के इसरो के इस महत्वाकांक्षी मिशन से देशभर की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं.चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग के लिए लोग मंदिरों में जाकर प्रार्थना कर रहे हैं. तो कहीं मस्जिदों में दुआएं मांगी जा रही है. चंद्रयान-3 को लेकर पूरा देश काफी उत्साहित हैं. दूसरी ओर, चंद्रयान 3 में जमशेदपुर के डीएवी बिष्टुपुर के रहने वाले आयुष झा भी उस टीम के हिस्सा है, जो चंद्रान क3 की लैंडिंग कर रही है. आयुष झा मूलत: चाईबासा का रहने वाला है. उसके पिता चक्रधरपुर में टीचर रहे है. मां हाऊस वाइफ है. इस तरह झारखंड भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है.



