
जमशेदपुर : दीपम (डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट्स मैनेजमेंट) के सचिव के बयान पर ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन ने विरोध जताया है. दीपम के सचिव का कहना है कि पीएसयू बैंकों के निजीकरण से नौकरियां पैदा होंगी, छीनी नहीं जाएंगी. एक इंटरव्यू में दीपम के सचिव तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि निजीकरण नौकरियों, टिकाऊ नौकरियों को बढ़ाने के लिए किया जाता है. यदि संगठन पर्याप्त तेजी से नहीं बदलते हैं, तो वे अप्रचलित हो सकते हैं. इस पर ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के जेनरल काउंसिल मेंबर हीरा अरकने ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने बड़े लोग जो मामलों के शीर्ष पर हैं, ऐसे व्यापक बयान देते हैं जो तथ्यों और वास्तविकताओं के विपरीत हैं. निजीकरण ने नौकरियों को खतरे में डाल दिया है, नौकरी की सुरक्षा, नौकरी की स्थायीता और महत्वपूर्ण रूप से निजीकरण से आरक्षण की नीति तुरंत समाप्त हो जाएगी. ऑल “इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन” श्री पांडे से पूरी तरह असहमत हैं. हम उनके विचारों और टिप्पणियों का कड़ा विरोध करते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
एसोसिएशन की ओर से श्री अरकने ने कहा है कि आज भी आम जनता का विश्वास सरकारी संस्थानों में है. सरकार के सभी राष्ट्रहित और सामाज हित के कार्यक्रम सरकारी बैंको द्वारा लागू किए जाते हैं. देश के युवा बेरोजगार सरकारी नौकरी ढूंढते हैं और अपना भविष्य उसमें सुरक्षित मानते हैं. निजी संस्थान हायर और फायर सिस्टम के तहत नौकरियां देती हैं. निजीकरण से राष्ट्रीयकरण का मूल उद्देश, जो देश की आम जनता, दबे-कुचले लोगों का उत्थान, किसानों का मददगार, छोटे व्यापारियों और उद्योगों के विकास का रास्ता बंद हो जाएगा. निजीकरण का मतलब लाभ कमाना और अपना हित साधन है, न की समाज और राष्ट्र का विकास. देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ सरकारी संस्थान ही हैं, चाहे बैंक हों या बीमा, तेल कंपनियां, रेलवे आदि आदि. इन संस्थानों को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की आवश्यकता है न की निजी हाथों में सौंपने की.





