
जमशेदपुर : कोल्हान के सबसे बड़े अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल ने एक और नया कारनामा कर दिखाया है। एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के नर्सों ने एक जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित करने का मामला प्रकाश में आया है। हालांकि बाद में उस व्यक्ति की मौत हो गई। फिर भी अस्पताल प्रबंधन पर इस तरह की लापरवाही बड़ा सवाल खड़ा करती है।
हयुम पाइप बस्ती छायानगर निवासी 50 वर्षीय रवि नामता को रविवार भोर 5 बजे ठंड लगने की शिकायत को लेकर एमजीएम अस्पताल लाया गया जहां ड्युटी पर तैनात नर्सों ने जांच करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। रवि के परिजन उसे मृत समझकर घर ले गए। घर ले जाने के बाद सभी ने पाया कि रवि की सांसे चल रही है। परिजन तत्काल उसे इलाज के लिए फिर से एमजीएम अस्पताल लेकर गए। इस बार वार्ड में तैनात जूनियर डॉक्टरों ने उसकी जांच की और उसका इलाज शुरू किया। रवि के बेटे राजेश ने बताया कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने 2 इंजेक्शन लगाया और ऑक्सीजन मस्क भी लगाया। हालांकि 2 घाटे बाद उसके मौत हो गई।
एमजीएम ने बनाया ब्राउट डेथ का पेपर

वहीं इस मामले के बाद एमजीएम प्रबंधन ने रवि के परिजनों को ब्राउट डेथ का पेपर बना कर दिया है। जिसमें डॉक्टर एन उरांव ने साकची पुलिस को एक आवेदन लिखा है कि 15 दिसंबर को सुबह 9 बजकर 10 मिनट में एक व्यक्ति रवि नामता को लाया गया जिसे जांच के बाद मृत घोषित कर दिया गया। अब यहां सवाल ये उठता है कि जब वह सुबह 5 बजे अस्पताल लाया गया तो उसे उस वक़्त मृत घोषित किया जाना था और अगर वह ब्राउट डेथ था तो डॉक्टरों ने दो घंटे तक उसका इलाज क्यूं किया।







