जमशेदपुर : जमशेदपुर हो या दुमका या उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के दुबहड़ गांव व आसपास का क्षेत्र हो, स्व आरबी सिंह का नाम आते ही लोगों के मन में उनके मन में आदर व सम्मान की भावना बढ़ जाती है. व्यवसाय जगत हो या समाजसेवा का क्षेत्र, बड़े आदर के साथ उनका नाम लिया जाता है. बलिया के दुबहड़ गांव में 1942 में जन्मे स्व आरबी सिंह (पूरा नाम-राम बहादुर सिंह) 1960 में जमशेदपुर आये थे. तब से जमशेदपुर की मिट्टी ने उन्हें अपना बना लिया. अपनी मेहनत, लगन और इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने एक मुकाम हासिल की. व्यवसाय और समाजसेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ते हुए दूसरों के लिए उदाहरण बन गये. (नीचे भी पढ़ें)

आरंभिक काल में जब वह अपने पैतृक गांव से जमशेदपुर आये, तो यहां नौकरी किया करते थे. ईमानदारी और अथक परिश्रम के बल पर जमशेदपुर के जुगसलाई स्थित चौक बाजार में उन्होंने तेल और चीनी का थोक (होलसेल) व्यवसाय शुरू किया. इस बीच परसुडीह में कृषि उत्पादन बाजार समिति की स्थापना हुई और यहां से पूरा थोक व्यवसाय बाजर समिति प्रांगण में स्थानांतरित हो गया. तब आरबी सिंह बाजार समिति व्यापार मंडल के अध्यक्ष बने. इस पद पर रहते हुए अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ ही उन्होंने अन्य व्यवसायियों की समस्याओं के समाधान में भी अग्रणी भूमिका निभाई. स्व सिंह सिंहभूम चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में भी पदाधिकारी के पद पर रहे थे. इस बीच धर्म-आध्यात्म के क्षेत्र में कार्य किये. जुगसलाई के चौक बाजार स्थित ठाकुर बाड़ी मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करवायी. वहीं, दुमका जिले के श्री बासुकीनाथ धाम में टाटानगर बासुकी नाथ धर्मशाला के निर्माण में संस्थापक सदस्य के रूप में आग्रणी भूमिका निभायी. 21 जुलाई 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस धर्मशाला का उद्घाटन किया. (नीचे भी पढ़ें)

जमशेदपुर और दुमका जहां उनके उक्त कार्यों के लिए आज याद करता है, वहीं उनके पैतृक गांव और आसपास के क्षेत्र के लोग भी आज याद कर भावुक हो उठते हैं. वहां गरीब बेटियों की शादी में सहयोग के लिए वे याद किये जाते हैं. आरबी सिंह का स्वर्गवास होने के पश्चात उनके ज्येष्ठ पुत्र शिवजी सिंह उर्फ गुड्डू सिंह और कनिष्ठ पुत्र श्याम सिंह उनके कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं. उनके द्वारा भी अपने व्यवसाय को गति देने के साथ ही समाजसेवा के क्षेत्र में गरीब बच्चों की पढ़ाई में सहयोग आदि जैसे कार्य किये जा रहे हैं.



