जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के ब्लड बैंक को अत्याधुनिक ऑटोमेटिक एलाइजा (ईएलआईएसए) टेस्ट मशीन की सौगात मिली है. करीब 40 लाख रुपए से अधिक लागत वाली यह मशीन मंगलवार को अस्पताल पहुंच गयी. इसके शुरू होने के बाद रक्त जांच की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सटीक और सुरक्षित हो जाएगी. सबसे बड़ी बात यह है कि अब 190 रक्तदाताओं के खून की पांच महत्वपूर्ण जांच मात्र आधे घंटे में पूरी की जा सकेगी. अस्पताल में अब तक रक्त जांच के लिए सेमी-ऑटोमेटिक मशीन का उपयोग किया जाता था, जिसकी क्षमता सीमित थी और जांच में अधिक समय लगता था. नई मशीन पूरी तरह ऑटोमेटिक है, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में रक्त नमूनों की जांच तेजी से की जा सकेगी. इस अत्याधुनिक मशीन के माध्यम से रक्त में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, मलेरिया और सिफिलिस जैसी गंभीर बीमारियों की जांच की जाएगी. किसी भी मरीज को रक्त चढ़ाने से पहले इन जांचों का होना अनिवार्य होता है, ताकि संक्रमित रक्त के कारण किसी प्रकार का खतरा न हो. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, मशीन को स्थापित करने और ब्लड बैंक कर्मियों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद लगभग 10 दिनों में मशीन से नियमित जांच कार्य शुरू होने की संभावना है. (नीचे भी पढ़ें)

एमजीएम ब्लड बैंक में सामान्य तौर पर मरीजों को चढ़ाए जाने वाले रक्त की जांच पहले से कर सुरक्षित रखी जाती है. हालांकि, कई बार विशेष रक्त समूह की तत्काल आवश्यकता पड़ने पर उसी समय जांच करनी पड़ती है. इसके अलावा रक्तदान शिविरों में एक साथ बड़ी संख्या में एकत्र रक्त की जांच भी चुनौतीपूर्ण होती है. ऐसे में नई मशीन आपातकालीन परिस्थितियों में बेहद उपयोगी साबित होगी और समय पर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराकर मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाएगी. इस मशीन का लाभ केवल पूर्वी सिंहभूम तक सीमित नहीं रहेगा. चाईबासा ब्लड बैंक से भी रक्त जांच के लिए नमूने एमजीएम अस्पताल भेजे जाते हैं. अब वहां से आने वाले रक्त की जांच भी इसी मशीन से तेजी से की जा सकेगी. हाल ही में विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर चाईबासा से 297 यूनिट रक्त जांच के लिए जमशेदपुर भेजा गया था. जांच पूरी होने के बाद इन यूनिटों को वापस भेजा जाता है. (नीचे भी पढ़ें)
गौरतलब है कि पश्चिमी सिंहभूम में पूर्व में संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का गंभीर मामला सामने आने के बाद चाईबासा में रक्त जांच की प्रक्रिया बंद कर दी गयी थी और इसकी जिम्मेदारी एमजीएम अस्पताल को सौंपी गयी थी. ऐसे में नई ऑटोमेटिक एलाइजा मशीन न केवल जांच क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि रक्त सुरक्षा व्यवस्था को भी और अधिक मजबूत बनाएगी.







