जमशेदपुर: जमशेदपुर में सुभाष संस्कृति परिषद के बैनर तले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गयी. कार्यक्रम बिष्टुपुर के के रोड श्रीलेदर्स शोरू में आयोजित किया गया, जहां वक्ताओं ने नेताजी के राष्ट्रवादी विचारों और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया. मुख्य वक्ता शेखर डे ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक अनंत व्यक्तित्व थे, जिनकी तुलना किसी भी अन्य व्यक्ति से नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि परिषद साल भर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नेताजी के विचारों, उनके राष्ट्रवाद और आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है. (नीचे भी पढ़ें)

श्री डे ने कहा कि आज देशवासियों में राष्ट्रवाद की भावना कमजोर होती जा रही है, जबकि राष्ट्रवाद के बिना किसी भी देश का विकास संभव नहीं है. उन्होंने धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की आवश्यकता पर जोर दिया. सिंगापुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां विभिन्न धर्मों के लोग रहते हुए भी एक ही सोच रखते हैं—’नेशन फर्स्ट’. नेताजी के राष्ट्रवादी विचारों को जीवन में आत्मसात करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है. (नीचे भी पढ़ें)

कार्यक्रम की शुरुआत मॉडरेटर मीरा शर्मा के स्वागत भाषण से हुई. इसके बाद शुभचिंतकों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण किया गया. सभा को शेखर डे, सुरोजित चट्टोपाध्याय, आशीष गुप्ता एवं परेश कुमार नंदी ने संबोधित किया. कविता पाठ प्रीतिलेखा रॉय ने किया. इस अवसर पर काउंसिल मेंबर हरगौरी महतो द्वारा लिखित पुस्तक ‘समृद्धि के सोपान’ का विमोचन किया गया, जो नेताजी के धर्म और कर्म आधारित विचारों का सार प्रस्तुत करती है. लेखक ने पुस्तक लेखन से जुड़े अपने संक्षिप्त अनुभव भी साझा किए. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं नेताजी के विचारों से प्रेरित लोग उपस्थित रहे.



