- उप प्रमुख सपन महतो की सूचना पर अधिकारियों ने रात 11 बजे की भोजन की व्यवस्था

धालभूमगढ़ : बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवातीय तूफान यास को लेकर प्रखंड की कोकपाड़ा पंचायत भवन में बने शेल्टर होम में आंधी तूफान से बचने के लिए 27 लोग शरण लिये हुए थे. लेकिन दिन भर किसी सरकारी पदाधिकारी या कर्मचारी ने इनकी सुधी नही ली. सरकारी कर्मियों ने नाश्ता और भोजन के लिए नहीं पूछा. इस वजह से शेल्टर होम में बच्चे और महिलाओं को परिवार के साथ दिन भर भूखे प्यासे रहना पड़ा, जिससे अब शरण लेने वाले ग्रामीणों में सरकारी अधिकारियों के प्रति रोष हैं. पंचायत भवन में शरण लिए लोगों ने बताया कि वे लोग अपने परिवार के साथ पंचायत भवन शेल्टर होम सुबह 8:00 बजे पहुंच गए थे. लेकिन न तो दिनभर प्रशासन की ओर से और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से भोजन और नाश्ता के लिए कुछ व्यवस्था की गई. मजबूरन सभी को देर रात तक भूखे रहना पड़ा. (नीचे भी पढ़ें)
उपप्रमुख ने लिया जायजा : लगभग 8:30 बजे कुड़मी संस्कृति विकास समिति के अध्यक्ष सह उप प्रमुख सपन कुमार महतो ने पंचायत भवन जाकर जायजा लिया. इस दौरान अंधेरे में सभी लोगों को भूखे प्यासे बैठे देखा. सुबह से भूखे रहने की बात सुनकर तुरंत सूखे नाश्ता की व्यवस्था करायी. उसके बाद कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी. (नीचे भी पढ़ें)
रात 10 बजे मिला खाना : खबर सुनकर कोकपाड़ा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य काजल भालुक के पति संजीव भालुक ने आकर आश्रित लोगों को आश्वासन देते हुए बताया कि प्रशासन की ओर से यदि एक घंटा के अंदर कुछ व्यवस्था नहीं की जाती है तो वे निजी स्तर से भोजन की व्यवस्था करेंगे. रात 10:00 बजे तक जब प्रशासन की ओर से भोजन के लिए किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं हुई तो संजीव भालुक के प्रयास से पंचायत भवन में रह रहे सभी आश्रितों को खाने की व्यवस्था करायी गयी. (नीचे भी पढ़ें)
प्रशासन ने रात 11 बजे दिया खाना : कोकपाड़ा पंचायत भवन शेल्टर होम में रह रहे ग्रामीणों की किसी प्रकार की सहायता नहीं मिलने की सूचना के बाद प्रशासन की ओर से रात 11:00 बजे खिचड़ी और मूढी पहुंचाई गई. इस दौरान आश्रित लोगों ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए प्रशासन की और से इस प्रकार की संवेदनहीनता को लेकर नाराजगी जताई. इस विषय में बीडीओ शालिनी खालको से पूछने पर उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि उच्च विद्यालय कोकपाड़ा को शेल्टर होम बनाया गया था और 27 लोग वहां ना रहकर यहां शरण लिये हुए थे और प्रशासन को इसकी सूचना नही थी जिसके कारण लोगों को सहायता पहुंचाने में प्रशासन को कुछ बिलम्ब हुई है.





