जादूगोड़ा : रविवार को महालया के मौके पर हाता माताजी आश्रम में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद् का 23वां वार्षिकोत्सव आयोजित हुआ. झारखंड प्रभा नामक पुस्तक के विमोचन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई. झारखंड प्रभा के संपादक सुनील कुमार दे ने झारखंड प्रभा की विशेषता पर प्रकाश डाला. कई अतिथियों ने समाज निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका विषय पर अपने विचार रखे. इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए घाटशिला के पूर्व विधायक सह कार्यक्रम में सम्मानीय अतिथि सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि झारखंड प्रभा के माध्यम से झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद् सभी भाषाओं को उचित सम्मान देने का काम कर रही है जो आज के समय में काफी प्रासंगिक है. झारखंड प्रभा सचमुच भाषाई एकता का प्रतीक है. (नीचे भी पढ़ें)

मौके पर शिक्षाविद् मित्रेश्वर अग्निमित्र ने झारखंड साहित्य परिषद के पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की. पूर्व विधायक मेनका सरदार ने माताजी आश्रम एवं झारखंड साहित्य परिषद् के क्रियाकलापों की भूरि-भूरि प्रशंसा की. इससे पूर्व साहित्यकार विकास कुमार भकत व वीरेंद्र घोष की अनुवाद पुस्तक का भी विमोचन हुआ. सम्मेलन में परिषद् की ओर से टांगराइन मध्य विद्यालय के प्रधान शिक्षक अरविंद तिवारी, शंकरदा के जाने माने साहित्यकार करुणामय मंडल समेत बच्चों व गणमान्य लोगों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
इस कार्यक्रम में सुनील कुमार दे, सूर्य सिंह बेसरा, करुणामय मण्डल, वीरेंद्र घोष, शंकर चंद्र गोप, वीथिका मण्डल, पूजा महतो, विकास कुमार भकत, पंकज कुमार मिश्र, भवतारण मण्डल, साधुचरण पाल, आशुतोष मण्डल, सुदीप मुखर्जी, उज्ज्वल मण्डल, मृणाल पाल, स्वप्न मंडल, कृष्ण पद मंडल, आनन्द साहू, बिनोद ज्योतिषी, मोनी पाल, सुधांशु मिश्र, बलराम गोप, कृष्ण गोप, दुलाल मुखर्जी, मिथुन साहू, नारायण चटर्जी, तपन मंडल, रामकृष्ण सरदार, ब्रह्म पद मराल, सुजाता मराल, बेला रानी मंडल, आशीष मंडल, सनातन महतो, हिरण महतो, अरविंद दे, संजय साहू, बीरेन मंडल, शक्ति पद रजक, अर्जुन मुदी, सूर्य शंकर कर, हरे मोहन मण्डल, तरुण मण्डल, लोचना मण्डल, साधना बनर्जी, निताई महाकुड़, चीनू माँ, कमल कांति घोष, तरुण दे समेत काफी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.








