गालूडीह: जिला मानसिक स्वास्थ्य केंद्र सदर अस्पताल की ओर से शनिवार को गालूडीह स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में मानसिक कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में विद्यालय के 10वीं कक्षा के छात्रा शामिल हुए थे. सदर अस्पताल के मनोवैज्ञानिक स्मिता हेंब्रम एवं तंबाकू नियंत्रित मनोवैज्ञानिक सबिता कुमारी सांडिल द्वारा छात्राओं को मानसिक रोग के लक्षण एवं तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई. मनोवैज्ञानिक स्मिता हेंब्रम ने कहा कि अक्सर ग्रामीण क्षेत्र में मानसिक रोगियों को झाड़ फूंक कराया जाता है, जबकि उनका उपचार कराना चाहिए.(नीचे भी पढे)
खास कर बच्चो में इसका असर ज्यादा दिखाई देता है, इसका कारण लोगों में जागरूकता का अभाव है. इसको लेकर छात्राओं को जागरूक किया गया. वहीं मनोवैज्ञानिक साबिता ने कहा कि 18 वर्ष के कम उम्र के बच्चे तंबाकू से तैयार किये जाने वाला कोई भी सामग्री खरीद या बेच नहीं सकता. यह कानूनन अपराध है, कोई भी अपने खेत या घर के आंगन में बिना सरकारी अनुमति के तंबाकू युक्त नशीला पदार्थ उत्पादन नहीं कर सकते, इससे बच्चों में बुरा असर पड़ता है, साथ ही वे कानून के दायरे में आ सकते है.



