
जमशेदपुर : ज्येष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है. महिलाएं ये व्रत पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य व परिवार की उन्नति के लिए रखती हैं. वही शुक्रवार को वट सावित्री है. महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना की. इस दौरान जमशेदपुर और आस-पास की महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ वट सावित्री व्रत कर बरगद की पूजा करती नजर आईं. (नीचे भी पढ़ें)

आचार्य बताते हैं कि महिलाओं को सुबह स्नान कर बांस की टोकरी में सप्त धान्य रखकर ब्रह्मा व सावित्री की मूर्ति की स्थापना तथा दूसरी टोकरी में सत्यवान व सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करनी चाहिए. फिर यह टोकरियां वट वृक्ष के नीचे रखकर वृक्ष की जड़ में जल देते हुए सावित्री व सत्यवान की पूजा की जाती है. पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल व धूप चढ़ाया जाता है. वटवृक्ष के तने पर न्यूनतम सात बार परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटने से पूजा का संपूर्ण फल मिलता है. इस व्रत के समय महिलाएं सत्यवान और सावित्री के अटूट संबंध की कथा सुनती और सुनाती हैं.



