जमशेदपुर : जमशेदपुर के छोटा गोविंदपुर जलापूर्ति योजना पिछले तीन दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह बाधित है. बताया जा रहा है कि मूसलाधार बारिश के दौरान बिजली गिरने से जलापूर्ति योजना का ट्रांसफार्मर जल गया, जिसके बाद करीब डेढ़ लाख लोगों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है. पानी नहीं मिलने से क्षेत्र के लोगों में हाहाकार की स्थिति है और उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक, खराब हुए ट्रांसफार्मर को मरम्मत के लिए वर्कशॉप भेज दिया गया है. जलापूर्ति योजना के रखरखाव का काम देख रहे संवेदक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि ट्रांसफार्मर की मरम्मत में करीब सात दिन का समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि ट्रांसफार्मर की मरम्मत होते ही जलापूर्ति को फिर से पहले की तरह सुचारू कर दिया जाएगा. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि पिछले 35 महीनों से उनका भुगतान भी लंबित है. इसके बावजूद उन्होंने अपने स्तर से जलापूर्ति को बाधित नहीं होने देने का प्रयास किया है. लेकिन इस बार ट्रांसफार्मर पूरी तरह खराब होने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है. विभाग की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है. उन्होंने इसके लिए खेद भी जताया. (नीचे भी पढ़ें)
वैकल्पिक व्यवस्था पर उठे सवाल : इतनी बड़ी आबादी को पानी उपलब्ध कराने वाली जलापूर्ति योजना में मुख्य ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद किसी तरह की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने को लेकर अब पेयजल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि आपात स्थिति के लिए विभाग को वैकल्पिक ट्रांसफार्मर या बिजली-पंप की व्यवस्था रखनी चाहिए थी, ताकि तकनीकी खराबी के दौरान भी कम से कम आवश्यक जलापूर्ति जारी रह सके. स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटा गोविंदपुर जलापूर्ति योजना पहले भी विभिन्न कारणों से विवादों में रही है. अब दो दिनों से पानी की आपूर्ति ठप होने के बाद लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. उपभोक्ताओं में विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है. (नीचे भी पढ़ें)
जेमिनी कंपनी के साइट इंजीनियर मनराज के बयान पर नजर : मौजूदा जल संकट और जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर जेमिनी कंपनी के साइट इंजीनियर मनराज का पक्ष भी महत्वपूर्ण है. योजना में तकनीकी व्यवस्था और वर्तमान स्थिति को लेकर उन्होंने क्या जानकारी दी, ट्रांसफार्मर की मरम्मत में कितना समय लगेगा और उपभोक्ताओं के लिए तत्काल क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है. इन सभी सवालों पर उनका पक्ष सामने आना जरूरी है.




