रांची : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी सरकार को घेरा. भाजपा विधायकों ने सरकार की नियोजन नीति को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की. विधायकों का कहना था कि सरकार स्थानीयता व नियोजन नीति को लटकाए हुए है. उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देना ही नहीं चाहती है. इस सरकार में युवाओं को नौकरी की उम्मीद करना बेकार है. सरकार युवाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है. दूसरे दिन न केवल विपक्ष ने सरकार का विरोध किया, बल्कि सत्ताधारी झामुमो के विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने भी सरकार को घेरा. जेएमएम विधायक लोबिन हेंब्रम विरोध में बहंगी लेकर विधानसभा पहुंचे. (नीचे भी पढ़े)
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार किसी की नहीं सुनती है और जनता को गुमराह कर रही है. हेमंत सोरेन अपने विधायकों से भी बात नहीं करते हैं. जल, जंगल जमीन के नाम पर सत्ता में आयी हेमंत सरकार में इसी मामले पर भयादोहन हो रहा है. स्थानीयता एवं नियोजन नीति अब तक नहीं बन पायी. उन्होंने राज्य में पेसा कानून के उल्लंघन के साथ ही सरकार पर 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति के नाम पर लोगों को झुनझुना थमा देने का आरोप भी लगाया. इसी कड़ी में बड़कागांव के कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने बढ़ते अपराधों पर भी सवाल खड़ा किया. उन्होंने रामगढ़ में कानून व्यवस्था पर को लेकर भी गंभीर आरोप लगाये तथा कहा कि राज्य में अपराधी बेलगाम हैं और पुलिस कमीशनखोरी में व्यस्त है. विधायक अंबा प्रसाद के विधायक प्रतिनिधि को बाइक सवार अपराधियों ने दिन-दहाड़े गोली मार दी. उन्होंने इस हत्या को खुद पर हमला करार देते हुए कहा, मेरे सबसे करीबी व्यक्ति तक अपराधी पहुंच गये, यह हमला मुझ पर हमला है. पुलिस अपराधियों का संरक्षण कर रही है.(नीचे भी पढ़े)
सोशल मीडिया पर अंबा प्रसाद का एक वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है जिसमें हत्या के बाद वह पुलिस अधिकारियों से बात कर रही हैं.महागामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार से सभी प्रभावित किसानों को सुखाड़ राहत राशि दिए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि राज्य में सुखाड़ राशि का लाभ लेने को 25 लाख से अधिक किसानों ने सरकार के पास आवेदन कर रखा है, पर अब भी करीब 50 फीसदी किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका है. राज्य सरकार सुखाड़ राहत राशि से वंचित 12 लाख से अधिक किसानों को जल्द से जल्द इसका लाभ मुहैया कराए. शून्य काल के ही दौरान दीपिका पांडेय ने कृषक मित्रों का भी मसला उठाया. वे कृषक मित्रों की मांगों पर अविलंब निर्णय लिये जाने की मांग सरकार से कर रही थीं.



