जमशेदपुर : राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव को लेकर झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी अचानक तेज हो गई है. इस चुनाव के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों, सत्तारूढ़ झामुमो, इंडिया गठबंधन की उसकी सहयोगी कांग्रेस एवं प्रमुख विपक्षी दल भाजपा तो पहले से चुनावी बिसात पर गोटियां सेट कर ही रहे थे, लेकिन अब दो अन्य प्रत्याशियों के अचानक चुनाव मैदान में कूद पड़ने से राज्य का राजनीतिक माहौल अचानक गड्ड-मड्ड हो गया-सा लगने लगा है. हालात ये हैं कि झारखंड की राजनीति के बड़े जानकार भी वर्तमान चुनावी माहौल पर फिलहाल कोई टिप्पणी करने से बचते दिख रहे हैं. फिलहाल स्थिति यह है कि झामुमो सुप्रीमो, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फिलहाल अपने सारे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर पार्टी नेताओं के साथ चुनावी रणनीति तैयार करने में लग गए हैं. उधर कांग्रेस की ओर से झारखंड के लिए नामित चुनाव प्रभारी मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम भूपेश बघेल एवं अजय शर्मा भी चुनावी गणित सुलझाने के लिए रांची पहुंच चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी रांची में डेरा डाल चुके हैं. बाकी दो निर्दल प्रत्याशी किस रूप में कौन बिसात बिछा रहे हैं, यह अभी साफ नहीं है.(नीचे भी पढ़े)
बता दें कि पूर्व झामुमो सुप्रीमो दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन एवं भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हुई दोनों राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए आगामी 8 जून को नामांकन की अंतिम तिथि है, जबकि आगामी 18 जून को मतदान होना है. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ झामुमो सरकार को कुल 56 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें से 34 विधायक अकेले झामुमो के हैं. गठबंधन के दूसरे घटक कांग्रेस के पास कुल 16 विधायक हैं, जबकि अन्य घटकों के कुल छह विधायक हैं. दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी एनडीए गठबंधन के पास कुल 24 विधायक हैं.वर्तमान राज्यसभा उप चुनाव के लिए सबसे पहले इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के रूप में बोकारो के प्रणव झा के नाम की घोषणा की, जिसको लेकर गठबंधन के दो प्रमुख घटकों कांग्रेस व झामुमो में ही ठन गई और शुक्रवार को झामुमो ने कांग्रेस पर एकतरफा प्रत्याशी घोषित करने का आरोप लगाते हुए राज्य की दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. यह अलग बात है कि शनिवार को झामुमो ने अब तक वैद्यनाथ राम के रूप में एक ही प्रत्याशी के नाम की घोषणा की है. हालांकि पार्टी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि दूसरी सीट पर प्रत्याशी देगा या गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणव झा को समर्थन देने की घोषणा भी नहीं की है.(नीचे भी पढ़े)
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की ओर से जमशेदपुर एक्सएलआरआइ के प्राध्यापक एवं पार्टी नेता डॉ गौरव वल्लभ को अपना प्रत्याशी घोषित किये जाने की प्रबल संभावना के मद्देनजर राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं. लेकिन आज पूर्व राज्यसभा सांसद एवं प्रमुख उद्यमी परिमल नाथवानी एवं आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम वाइएसआर रेड्डी की पार्टी के सदस्य एवं पूर्व राज्यसभा सांसद वाइ साईं विजय रेड्डी ने नामांकन पत्रों की खरीद कर उससे भी बड़ा धमाका कर दिया है. इन दोनों के चुनाव मैदान में कूदने से चुनावी माहौल ने अचानक अलग रूप ले लिया है. इनकी उपस्थिति से राज्यसभा चुनाव के मतदाताओं का अंकगणित अबूझ पहेली बन गया है.बताते चलें कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय प्रत्याशी के प्रस्तावक के रूप में 9 विधायकों की आवश्यकता होती है. झामुमो, कांग्रेस एवं भाजपा के पास तो इसके लिए विधायकों की पर्याप्त संख्या है, लेकिन बाकी के दो निर्दलीय प्रत्याशी किन विधायकों के बूते पर मैदान में उतर रहे हैं इसका खुलासा होना अभी बाकी है. (नीचे भी पढ़े)
इस चुनाव में भाग लेनेवाले मतदाताओं के रुख का पता तो मतदान के बाद ही हो सकेगा. विधानसभा में झामुमो के 34 विधायक होने के कारण उसके एक प्रत्याशी की जीत तो पक्की मानी जा रही है, इसके बाद भी पार्टी के 6 विधायक अतिरिक्त रहेंगे. कांग्रेस पार्टी ने इन 6 अतिरिक्त विधायकों सहित इंडिया गठबंधन के अन्य विधायकों के बल पर ही अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है. दूसरी ओर 24 विधायकों वाली भाजपा को अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए 4 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी.इन परिस्थितियों में राज्य सभा की दूसरी सीट का चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा, यह अनुमान लगा पाना कठिन हो रहा है.वैसे भी झारखंड में राज्य सभा के चुनाव का इतिहास रोचक रहा है और 2012 के राज्यसभा चुनाव के दौरान सामने आये कैश कांड तो प्रसिद्ध ही है, जब विधायकों को देने के लिए लाये जा रहे दो करोड़ से अधिक रुपये पकड़े गए थे और इसी के कारण मतदान ही रद्द हो गया था. निर्दल प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से इस बार के चुनाव में भी धन बल के प्रभावी रहने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
उद्योगपति परिमल नाथवानी की इंट्री से रोचक हुआ राज्यसभा चुनाव
रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव में उद्योगपति परिमल नाथवानी की इंट्री से नया रोमांचक हो गया है. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रुप मे पर्चा खरीद लिया है. विदित हो कि नाथवानी पहले भी झारखंड से राज्यसभा जा चुके है. अब यह माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें सपोर्ट करेगी. अगर उन्होंने दो तीन वोट किसी तरीके से अपने पक्ष में कर लिया तो कांग्रेस प्रत्याशी की हार हो सकती है. नाथवानी के मैदान में उतरने के बाद राज्यसभा चुनाव में खरीद फरोख्त की संभावना बढ़ गयी है. इस चुनाव में कोई भी किसी को वोट कर सकता है. लेकिन कोई भी पार्टी लाइन से अलग होकर वोट करेगा, यह समझना अधिक मुश्किल नहीं है. जानकार सूत्रों का कहना है कि उद्योगपति परिमल नाथवानी फिलहाल झारखंड में ही डेरा जमाए हुए है.
साईं विजय रेड्डी की इंट्री से नए समीकरण के आसार
रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव में दूसरे उद्योगपति वाई साईं विजय रेड्डी की भी इंट्री से मामला और रोमांचक होता नजर आ रहा है. उन्होंने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में पर्चा खरीदा है. विदित हो कि साईं विजय रेड्डी भी आंध्रप्रदेश से राज्यसभा सदस्य है. वे वाईएस राजशेखर रेड्डी के पार्टी के समय आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे. वैसे भी आंध्र प्रदेश की राजनीति में रेड्डी बंधुओं की काफी चलती है. यह सर्वविदित है. वे इस बार राज्यसभा सदस्य के लिए झारखंड का रुख किए है. इन्हें किस पर भरोसा है कहना मुश्किल है. लेकिन जब रुख किए है तो कोई सुराख तो होगा. साईं विजय रेड्डी के इंट्री से खरीद फरोख्त की संभावना प्रबल दिखती है. भाजपा के विधायकों को तोड़ना बड़ी मुश्किल काम है. बचे कांग्रेस या झामुमो के विधायक. झामुमो का तो एक सीट पक्का है. लेकिन दूसरे सीट के लिए महागठबंधन के लिए मुश्किल काम होता नजर आ रहा है.
इन लोगों ने खरीदा पर्चा: प्रणव झा-कांग्रेस, बैजनाथ राम- झामुमो, गौरव वल्लभ-भाजपा संभावित,परिमल नाथवानी-निर्दलीय, साईं विजय रेड्डी- निर्दलीय







