
जमशेदपुर : झारखंड ही नहीं बल्कि देश में मुसलिम समुदाय का पावन माह रमजान शुरू होने जा रहा है. बताया जाता है कि रमजान का महिना 25 अप्रैल से शुरू होगा. चांद के दीदार के बाद इस पर फैसला होगा. लॉकडाउन के दौरान मसजिदों में कोई विशेष नमाज या इफ्तार पार्टी तो नहीं होगी, लेकिन इस महान पर्व में लोग अपने घरों पर ही रहकर सेहरी व इफ्तार करेंगे. वहीं इसको लेकर बाजारों में भीड़ बढ़ने की संभावना है. झारखंड राज्य हज समिति के जिला कोऑर्डिनेटर तनवीर अहसन ने जमशेदपुर के उपायुक्त से मिलकर रमज़ान के दिनों में शाम के वक़्त बाज़ारो में भीड़ की आशंका जताई है, जिससे सामाजिक दूरी का उल्लंघन हो सकता है. उन्होंने सिटी एसपी से भी इस विषय में बात की. रोजा खोलने के वक्त लोग जल्दबाजी में खरीदारी करते हैं, भीड़ बढ़ जाती है इसका नमूना पिछले दिनों शब-ए-बारात में रोज़े की शाम को देखने को मिला था और इस तरह की भीड़ में सामाजिक दूरी को बरकरार रख पाना मुश्किल हो जाता है. रमजान शुरू होने पर अगर वक़्त ना बदला गया तो दिक्कत आ सकती है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रो में बाज़ारो के वक़्त को सुबह 8 से शाम 5 बजे तक करने से लोग इत्मिनान और सब्र के साथ सामाजिक दूरी का पालन करते हुए जरूरत की चीजें खरीद पाएंगे तथा बाजारों में सुचारू रूप से व्यवस्था भी कायम रहेगी. उपायुक्त ने कहा कि बाज़ारो में अगर सामाजिक दूरी का पालन नही हुआ तो सुझाव अनुरूप समय में परिवर्तन किया जाएगा. वही सिटी एसपी ने कहा कि पहले कुछ दिन देखना होगा अगर रमजान में शाम के वक़्त भीड़ बढ़ती है तो समय में परिवर्तन करना पड़ेगा. तनवीर अहसन ने जमशेदपुर के सभी मस्जिद के इमाम को भी पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि एक बड़ा मसला इस लॉकडाउन में सामूहिक तरावीह का है. संभावना है कि मस्जिदों में रोक की वजह से लोग घरों में इज्तेमाई यानी ( सामूहिक) तरावीह का आयोजन करेंगे और अगर ऐसा होता है तो इससे सामाजिक दूरी का भी उल्लंघन होगा और प्रशासन द्वारा लगाए धारा 144 का भी और इससे कोरोना बीमारी के फैलने का खतरा भी बढ़ जाएगा. उन्होंने सभी इमाम से अपील कर कहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से मुस्लिम समुदाय को घरों में सामूहिक तरावीह का आयोजन ना करने के लिए प्रेरित करें. ज़रूरत पड़े तो ऐसे पम्पलेट भी घर तक पहुंचाये जिसमे रमजान में सेहरी और इफ्तार के वक़्त के साथ सामूहिक जुटान न करने की सलाह दे, जिसमे तरावीह या इफ्तार के रूप लोग एकत्रित ना हो.







