
रांची : झारखंड विधानसभा में हंगामा के बीच ही कई सारे मुद्दे उठाये गये. इस दौरान कई सारे मुद्दे पर सरकार ने अपना लिखित जवाब भी दिया जबकि कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा भी हुई. चर्चा के दौरान ध्वनिमत से 2926 करोड़ रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट को पारित कर दिया गया. विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया था, लेकिन इसके बावजूद बजट पारित कर दिया गया. वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने अनुपूरक बजट पर चर्चा करते हुए बताया कि हेमंत सोरेन की सरकार फिजूलखर्ची पर विश्वास नहीं करती है. पूर्ववर्ती भाजपा की सरकार ने बजट की अधिकांश राशि की फिजुलखर्ची ही की थी. हमारी सरकार का मानना है कि वैसी योजनाओं पर ज्यादा राशि खर्च की जाये, जनता को लाभ मिले. वित्त मंत्री ने रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कहा कि दिसंबर माह तक बजट का 46 फीसदी राशि खर्च हो चुका है. भाजपा के विधायक 25 फीसदी खर्च होने की बात कर रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है. वित्त मंत्री ने कहा कि अनुपूरक बजट में ग्रामीण विद्युतीकरण को लेकर काफी प्रावधान किया गया है और ऊर्जा विभाग को सबसे ज्यादा राशि दी गयी है. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को राशि दी गयी है, जिसमें15वें वित्त आयोग से मिले 488 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को समाहित किया गया है. उन्होंने बताया कि राशि बांटने भी राशि खर्च होगी. ग्रीन कार्ड वाले को मुफ्त में राशन दिया जायेगा जबकि गरीबों को लुंगी धोती साड़ी योजना का लाभ दिया जायेगा. 13 लाख लोगों को पेंशन योजना का भी लाभ देने की घोषणा की गयी. (नीचे पूरी खबर देखें)

गरमा धान का मुद्दा उठाया बहरागोड़ा के विधायक ने
बहरागोड़ा से झामुमो विधायक समीर मोहंती ने अल्पसूचित प्रश्न के दौरान कृषि विभाग से पूछा कि क्या राज्य में बहुतायत में गरना धान की खेती की जाती है. इस पर कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि गरमा धान की खेती बहुतायत मात्रा में नहीं की जाती है. राज्य में खरीफ में धान की खेती लगभग 17.5 लाख हेक्टेयर होती है. उत्पादन लगभग 51 टन होता है जबकि गरमा धान की खेती 15 हजार हेक्टेयर की जाती है, जो खरीफ के लगभग 0.9 फीसदी है, जिसका उत्पादन 37500 टन होता है. समीर मोहंती ने पूछा कि एमएसपी पर गरमा धान नहीं खरीदे जाने के कारण किसानोंको बाजार में काफी कम कीमत ही मिल पा रही है. कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की वेबसाइट पर खरीफ मौसम 2021-2022 पर निर्धारित एमएसपी संबंधथित सूचना में गरना धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं है. यह राज्य स्तर का मामला नहीं है, केंद्र सरकार से इस मसले को लेकर जरूर बातचीत की जायेगी. (नीचे पूरी खबर देखें)

सरयू राय ने जमशेदपुर के तीन ज्वलंत मुद्दों को उठाया
जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने सोमवार को विधानसभा में जमशेदपुर के मोहरदा पेयजलापूर्ति, मालिकाना हक और म्युनिसिपैलिटी (जमशेदपुर अक्षेस) का मामला उठाया. अनुपूरक बजट पर अपने भाषण में श्री राय ने कहा कि बजट में सरकार ने ऊर्जा पर सबसे अधिक 588 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है, जबकि राजधानी रांची में भी रोज़ाना 6 घंटा बिजली कट रही है. इसके बाद स्वास्थ्य पर 518 करोड़ का प्रावधान किया है जिसमें से 444 करोड़ केन्द्र का अंशदान है, जबकि सरकारी अस्पतालों की स्थिति बहुत ही ख़राब है. परंतु नगर विकास में केवल 19 करोड़ रूपया ही दिया है. जबकि जमशेदपुर शहर में मोहरदा पेयजल आपूर्ति और आसपास के इलाक़ों में भी पेयजल आपूर्ति के लिये काफ़ी धन की ज़रूरत है. श्री राय ने आगे कहा कि 2005 में 86 बस्तियों वाली 1700 एकड़ ज़मीन को टाटा लीज़ से इसलिये अलग किया गया था कि मालिकाना देना है. पिछली सरकार ने इसकी जगह लीज़ का झुनझुना थमा दिया जिसे बस्तीवासियों ने स्वीकार नहीं किया. वर्तमान सरकार भी आश्वासन के बावजूद विलंब कर रही है. उन्होंने अपने भाषण में मालिकाना देने का फ़ायदा बताया और कहा कि सरकार जल्द से जल्द यहां के घरों का होल्डिंग नम्बर दे. श्री राय ने जमशेदपुर में नगर निगम बनाम औद्योगिक नगर का विवाद जल्द ख़त्म करने पर ज़ोर दिया और कहा कि देश में जमशेदपुर ही एकमात्र ऐसा शहर है जहां पर नगरपालिका के नाम पर असंवैधानिक जेएनएसी चल रहा है. सरकार जमशेदपुर की तीन समस्याओं-मालिकाना, मोहरदा और म्युनिसिपैलिटी का शीघ्र समाधान करे. (नीचे पूरी खबर देखें)

विधायक लंबोदर महतो ने ओबीसी आरक्षण की मांग की
आजसू विधायक लंबोदर महतो ने कहा कि ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण को लागू करने की मांग पर धरने पर बैठे हैं. आजसू पार्टी अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के विरोधी नहीं है. लेकिन हेमंत सरकार ने अपने चुनावी वादों में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने का जो वादा किया था. वो 2 साल बाद भी पूरा होता नहीं दिख रहा है. (नीचे पूरी खबर देखें)

विधानसभा में विधायक प्रदीप यादव ने उठाया मुद्दा
विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि झारखंड के 41 मिलिट्री और पारा मिलिट्री जवान पिछले 8 साल में देश की सुरक्षा में शहीद हो चुके हैं. प्रदीप यादव ने पूछा कि क्या यह सही है कि भारत और झारखंड सरकार से मिलने वाली सुविधाएं अब तक उनके आश्रितों को नहीं मिला है. जिस कारण उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है. इस पर सरकार की ओर से बताया गया कि शहीद परिवारों को विशेष अनुग्रह अनुदान के रूप में झारखंड गठन की तारीख से 2 लाख रुपए और 2018 से 10 लाख रुपए तथा अनुकंपा के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति का प्रावधान है. प्रावधान के तहत डीसी से प्राप्त प्रस्ताव के आलोक में अनुमान्य लाभ की स्वीकृति विभाग के स्तर से प्रदान की जाती है. सरकार ने बताया कि राज्य के शौर्य पुरस्कार से अलंकृत शहीद सैनिकों के आश्रित परिवार को शौर्य पुरस्कार श्रेणी के अनुरूप एकमुस्त नगद राशि का भुगतान करने का प्रावधान है. वर्तमान में 2 मामले निर्णय के प्रक्रियाधीन हैं. (नीचे पूरी खबर देखें)

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को गलती दिखायी और कहा क्या आप सब निकम्मा है
सदन की कार्रवाई के दौरान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सीपी सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो को भूल की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि आप सदन में आते हैं तो पहले विपक्ष और फिर सत्ता पक्ष का अभिवादन करते है. भाजपा विधायक ने कहा कि आज आपने पहले सत्ता और विपक्ष का अभिवादन किया, उम्मीद है कि आगे से स्पीकर भूल को सुधार लेंगे. इस दौरान सीपी सिंह ने कहा कि भाजपा के ही विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि सरकार के मंत्री निकम्मे है. इस पर सीपी सिंह ने कहा कि क्या आप सब निकम्मे है, यह बताइये.
भाजपा के रंधीर सिंह और कांग्रेस के इरफान में छीना झपटी
भाजपा के लोग सदन के बाहर तख्ती लगाकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसी बीच कांग्रेस के विधायक डॉ इरफान अंसारी आये और तख्ती को भाजपा विधायक रंधीर सिंह से लेने लगे. इस पर दोनों के बीच नोंकझोक हो गयी. दोनों के बीच छीना झपटी की नौबत आ गयी. हालांकि, इस तल्खी को बाद में खुद दोनों ने ही शांत कर लिया और इरफान अंसारी अंदर चले गये.




