नई दिल्ली : असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पासपोर्ट विवाद में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट में करारा झटका लगा है. पवन खेड़ा की याचिका पर सुनवाई के दौरान खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलीलें रखीं, जबकि तुषार मेहता ने खेड़ा की याचिका का विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट बेल की अवधि मंगलवार तक बढ़ाने से मना कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पवन खेड़ा गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करें. साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि गुवाहाटी हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित न हो. फर्जी आधार कार्ड पेश करने को लेकर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई. पवन खेड़ा के मामले में अभिषेक मनु सिंघवी और तुषार मेहता के बीच तीखी बहस भी हुई. (नीचे भी पढ़ें)
पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा निवास प्रमाण पत्र के तौर पर लगाये गए दस्तावेजों पर सवाल उठाए. कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब पते को लेकर स्पष्टता नहीं है तो तेलंगाना हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका क्यों दाखिल की गई? इस पर पवन खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जिस दस्तावेज पर सवाल उठ रहे हैं, उसे तेलंगाना हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुधार दिया गया था और इस बारे में जज को अवगत करा दिया गया था. उन्होंने कहा कि यह गलती जल्दबाजी में हुई थी ना कि किसी आपराधिक मंशा से. सिंघवी ने यह भी बताया कि खेड़ा की पत्नी तेलुगु हैं और वह विधायक पद की उम्मीदवार रह चुकी हैं. इसी वजह से हैदराबाद से जुड़ा संदर्भ आया. साथ ही उन्होंने कहा कि खेड़ा दिल्ली स्थित घर पर पुलिस भेज दी गई और उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया. (नीचे भी पढ़ें)
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जेनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया जिसके चलते दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई. सुप्रीम कोर्ट ने दोहारा इस बात पर सवाल उठाया कि पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में जो पता बताया था उसका सही और वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया और जिस पते के आधार पर याचिका दाखिल की गई, वही संदिग्ध बताया जा रहा है. इस बीच सिंघवी ने कहा कि वह सोमवार तक गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल कर देंगे और सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि तब तक उन्हें अंतरिम राहत दी जाए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड की गलत प्रति किसी आपराधिक सोच के तहत नहीं बल्कि हड़बड़ी में जमा हुई थी जिसे बाद में सुधार दिया गया. (नीचे भी पढ़ें)
इस दौरान जस्टिस माहेश्वरी सॉलिसिटर जनरल की उस दलील का जिक्र किया जिसमें कहा गया कि पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करते समय अपने आधार कार्ड का आगे का हिस्सा और अपनी पत्नी के आधार कार्ड का पिछला हिस्सा पेश किया था. इसके जरिये उन्होंने तेलंगाना में अपना घर दिखाने की कोशिश की थी. सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया था कि हाई कोर्ट से मिली राहत कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर हासिल की गई. (नीचे भी पढ़ें)
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा कि उनका विरोध इस बात को लेकर है कि असम सरकार ने एकतरफा आदजेश सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त कर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनका पक्ष सुने बिना ही तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई. वही तुषार मेहता ने जवाब देते हुए कहा कि वह पवन खेड़ा के हर झूठ का जवाब देने के लिए तैयार हैं, अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी अनुमति देता है. बताते चलें कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विगत 5 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति है, जिसे राज्य में नौ अप्रैल को होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में घोषित नहीं किया गया है. सरमा दंपति ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे झूठा और मनगढंत बताया था. इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने थाने में बीएनएस की धारा 175 (चुनाव के संबंध में गलतबयानी), 35 (निजी सुरक्षा के अधिकार) और 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया.



