सरायकेला: चैत्र पर्व पर चड़क पूजा के पहले दिन स्थानीय खरकई नदी के तट पर अवस्थित भैरव शाल में बाबा भैरव की पूजा- अर्चना की गयी. इसी के साथ सरायकेला चैत्र पर्व व महोत्सव का शुभारंभ हो गया. स्थानीय भैरवसाल में विधि- विधान के तहत बाबा भैरव की पूजा- अर्चना की गयी और परंपरा के अनुरूप बकरे की बली भी चढ़ायी गयी. इसके पश्चात भंडारा का भी आयोजन किया गया. जिसमें सरायकेला नगर के कई लोग भक्ति भाव से उपस्थित हुए. सृष्टि के रक्षक शिव शक्ति की आराधना के साथ रविवार को परंपरागत तरीके से भैरव पूजा कर नौ दिवसीय चैत्र पर्व राजकीय छऊ महोत्सव का शुभारंभ हुआ. (नीचे भी पढ़े)

सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव के तहत भैरव साल में प्रभारी एसडीओ निवेदिता नियती की उपस्थिति में भैरव बाबा की पूजा संपन्न कराई गई. इस अवसर पर पुजारी ने मंत्रोच्चार के साथ भैरव बाबा की पूजा करायी. बतौर यजमान जिला आपूर्ति पदाधिकारी सतेंद्र महतो पूजा में शामिल हुए. उन्होंने बाबा भैरव के दरबार में मत्था टेक क्षेत्र व कला जगत के लिए सुख-शांति व समृद्धि की कामना की. इस अवसर पर छऊ कलाकारों ने छऊ परिधान में तलवार व ढाल धारण कर फरिखंडा छऊ नृत्य का प्रदर्शन किया. प्रभारी एसडीओ निवेदिता नियती ने बताया कि चैत्र पर्व के धार्मिक अनुष्ठानों के तहत भैरव पूजा कर चैत्र पर्व राजकीय छऊ महोत्सव का शुभारंभ किया गया. नौ दिवसीय छऊ महोत्सव में सात अप्रैल को शुभ घट लाया जाएगा.(नीचे भी पढ़े)
राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के आडिटोरियम में ग्रामीण छऊ नृत्य दलों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन होगा. नौ अप्रैल को मां झूमकेश्वरी की पूजा- अर्चना की जाएगी. 10 अप्रैल को जात्रा घट लाया जाएगा. 11 अप्रैल को वृंदावनी घट, 12 अप्रैल को गौरैयाभार व 13 अप्रैल को कालिका घट का आगमन होगा. 14 अप्रैल को पाट संक्रांति के साथ चैत्र पर्व छऊ महोत्सव का समापन होगा. 11 से 13 अप्रैल तक राजकीय चैत्र पर्व छऊ महोत्सव में छऊ नृत्य की सभी शैलियों व अन्य नृत्य कलाओं का प्रदर्शन होगा. पूजा में आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला महंती समेत काफी संख्या में छऊ कलाकार शामिल हुए.



