
जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के हुए वेज रिवीजन समझौता का विरोध तेज हो चुका है. वेज रिवीजन समझौता को लेकर मजदूरों में काफी गुस्सा है. इसके तहत यूनियन के कमेटी मेंबरों पर भारी दबाव है. टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर सुनील दास ने कमेटी मेंबर के पद से इस्तीफा दे दिया. चुनाव लड़कर जीतने वाले आरएमएम के कमेटी मेंबर सुनील दास ने अपना इस्तीफा मंगलवार की दोपहर को यूनियन के अध्यक्ष के दफ्तर में दिया और अध्यक्ष के चेंबर में ही उनके खिलाफ में आवाज उठायी. अध्यक्ष आर रवि प्रसाद के करीबी उपाध्यक्ष शहनवाज आलम को ही वेज रिवीजन का घटिया समझौता कराने के लिए विलेन बताया और कहा कि इतना घटिया वेज रिवीजन समझौता हुआ है कि कर्मचारियों को कोई लाभ ही नहीं हो पाया है. इसके अलावा मजदूरों की आवाज तक कमेटी मेंबर होने के नाते उठाने नहीं दिया जा रहा है तो ऐसे में कमेटी मेंबर बनकर रहने की क्या जरूरत है. बताया जाता है कि दोपहर के वक्त सुनील दास टाटा वर्कर्स यूनियन के दफ्तर पहुंचे. उन्होंने वहां के रिसेप्सन में पहले कमेटी मेंबर के पद से इस्तीफा देने की पेशकश की, लेकिन वहां रिसीव नहीं हुआ तो वे अध्यक्ष के कोषांग में गये और वहां अध्यक्ष के निजी सचिव कुमार से मुलाकात कर उनको इस्तीफा सौंप दिया. यह यूनियन के इतिहास में अब तक की बड़ी घटना है क्योंकि यूनियन के खिलाफ असंतोष जताते हुए कमेटी मेंबर ने चुनाव लड़कर जीतने के बावजूद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इस इस्तीफा के बाद हड़कंप मच गया है. बताया जाता है कि हाल के दिनों में घटिया वेज रिवीजन समझौता हुआ, आरएमएम के कई सारे मुद्दे लंबित है, लेकिन कई माह से कमेटी मेंबरों को आवाज तक उठाने नहीं दिया जा रहा है. कमेटी मीटिंग में कोई सवाल तक पूछने नहीं दिया जा रहा है. इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठायी गयी और अब इस्तीफा शुरू हो गया है. न तो कोई कमेटी से ना ही कोई छलावा बल्कि सीधे कमेटी मेंबर के पद से ही सुनील दास ने इस्तीफा दे दिया है.



