
जमशेदपुर : टाटा स्टील में सोमवार 15 नवंबर से कर्मचारियों को अरली सेपरेशन स्कीम (इएसएस) आ चुका है. इसका नाम सुनहरे भविष्य की योजना (एसबीकेवाइ) दी गयी है. इएसएस स्कीम के साथ ही कर्मचारियों के लिए नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ स्कीम (जॉब फॉर जॉब) स्कीम भी आ गयी है. 15 नवंबर को इन दोनों को लांच कर दिया गया. इसके लिए आंतरिक सरकुलर भी जारी कर दिया गया है. इएसएस के सुनहरे भविष्य की योजना की स्कीम के तहत दस साल तक नौकरी करने वाले और जिनकी उम्र 40 या उसके पार हो, वे लोग आवेदन कर सकते है. इसके तहत इएसएस के इस योजना के तहत नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारियों को वर्तमान बेसिक और डीए को जोड़कर जो वेतन मिलता है, वह वेतन 60 साल की उम्र तक मिलता रहेगा और हर साल एक हजार रुपये की बढ़ोत्तरी भी होगी. यानी अगर किसी कर्मचारी का बेसिक 50 हजार रुपये है और डीए 10 हजार रुपये है तो कुल उसको 60 हजार रुपये प्रतिमाह मिलता होगा तो उसको इएसएस लेने के बाद 60 हजार रुपये उसकी उम्र के 60 साल तक मिलता रहेगा और हर साल एक हजार रुपये की बढ़ोत्तरी होती रहेगी. इसके लिए सारे कर्मचारी आवेदन कर सकते है. यह मैनेजमेंट का क्षेत्राधिकार होगा कि वह किसको इएसएस देना चाहती है और किसको इएसएस देना नहीं चाहती है. कर्मचारी 15 दिसंबर तक लोग इसके लिए आवेदन दे सकते है. इसके लिए सारे कर्मचारियों को लॉगइन की सुविधा दी गयी है.
जॉब फॉर जॉब यानी नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ स्कीम को यूनियन के दबाव के बाद चालू किया गया, इनको होगा लाभ
सोमवार 15 नवंबर से ही नौकरी छोड़ो-नौकरी पाओ स्कीम लांच की जायेगी. 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक लोग अपना आवेदन कर सकेंगे. नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ स्कीम 2018 से ही बंद है. इस स्कीम को चालू करने के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन की टीम ने लगातार दबाव बनाया, जिसके बाद इसको लांच किया जा रहा है. इसके तहत पांच साल छह माह की नौकरी जिसकी भी बची होगी, वैसे कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिलेगा. ऐसे कर्मचारियों को अपनी नौकरी छोड़कर योग्य बच्चे को नौकरी देनी होगी. इसके तहत जैसे ही इस स्कीम का लाभ मिलना शुरू होगा, वैसे ही कर्मचारी के बच्चे को ट्रेनिंग के बाद स्टाइपेंड मिलना शुरू हो जायेगा और कर्मचारी को मेंटेनेंस का 13 हजार रुपये मिलना शुरू हो जायेगा. कर्मचारी के बच्चे, जो डिप्लोमा होल्डर होंगे या इंजीनियरिंग किये हुए होंगे, उनको एक साल की ट्रेनिंग के बाद एनएस 7 ग्रेड में बहाल किया जायेगा और अगर कर्मचारी का बच्चा मैट्रिक पास होगा तो उसको दो साल का ट्रेनिंग देने के बाद एनएस 4 में ज्वाइन कराया जायेगा. जो भी चयनित बच्चे होंगे, उनको एनसीटीवीटी की परीक्षा पास करना होगा. ऐसे बच्चों को तीन बार में पास कर लेना होगा. पहले दो बार का मौका दिया जाता था. तीन बार में भी अगर बच्चा पास नहीं करता है तो उसके पिता को इएसएस दे दिया जायेगा और वर्तमान में जो इएसएस स्कीम लाया गया है, उस स्कीम का ही लाभ उक्त कर्मचारी को मिलने लगेगा और जो बच्चा ट्रेनिंग के लिए बहाल हुआ है, वह बाहर हो जायेगा. इसी तरह इंजीनियरिंग और डिप्लोमा का एक साल का ट्रेनिंग के बाद एक इंटरव्यू लिया जायेगा. अगर बच्चा इंटरव्यू में पास हो जाता है तो उसकी नौकरी एनएस 7 ग्रेड में पक्की हो जायेगी और अगर पास नहीं होता है तो एनएस 4 ग्रेड में उसको बहाल कर दिया जायेगा. अगर ऐसे बच्चे मॉड्यूल को पास नहीं कर पाते है तो उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा और फिर इएसएस स्कीम का लाभ कर्मचारी को दे दिया जायेगा, जो अभी दिया जा रहा है.





