जमशेदपुर : टाटा स्टील मैनेजमेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन की शिकायत लेकर टाटा स्टील के रजिस्टर्ड कर्मचारियों का दल जमशेदपुर की उपायुक्त के पास पहुंचा. इन लोगों ने एक शिकायत की है, जिसमें टाटा स्टील मैनेजमेंट और वर्तमान टाटा वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष द्वारा की जा रही असंवेधानिक कार्यो पर रोक लगाने एवं कानून संमत कार्यवाही करने की मांग की गयी है. (नीचे पढ़ें पूरी खबर)
इस ज्ञापन के माध्यम से बताया गया है कि वर्ष 2019 में टाटा स्टील मैनेजमेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच वेज रिविजन समझौता होता है, इस समझौते में 500 निबंधतो की बहाली लिखित परीक्षा के माध्यम से और शेष बचें निबंधतो की बहाली एक एनटीटीइ कंपनी एक साल के अंदर बनाकर करने का लिखित समझौता होता हैं. इस निबंधतो के नियोजन संबंधित समझौते की जानकारी उस समय के पूर्व टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष सभी समाचार पत्रों के माध्यम से देते हैं और आज के टाटा वर्कर्स यूनियन के महामंत्री और उस समय के पूर्व उपाध्यक्ष भी इस समझौते पर अपनी सहमति जताते है. (नीचे भी पढ़ें)
पर वर्तमान यूनियन अध्यक्ष वर्ष 2019 के इस लिखित समझौते पर सवाल उठाते है और साथ ही साथ उस समय सभी समाचार पत्रों में छपी पूर्व अध्यक्ष द्वारा दी गई बयान और वेज रिवीजन में निबंधतो के नियोजन संबंधित समझौते और समाचार पत्रों में छपी उस खबरों को फर्जी बताते है. इन लोगों ने कहाकि वर्तमान अध्यक्ष शायद ये भूल गए है कि टाटा स्टील मैनेजमेंट ने निबंधतो के नियोजन एनटीटीइ के माध्यम से करने के एवज में टाटा स्टील में कार्य कर रहे कर्मचारियों को मिलने वाली के सुविधाओं में कटौती की जैसे डीए फ्रीज कर दिया गया, वेज रिवीजन की अवधि बढ़ा दी गई. (नीचे पढ़ें पूरी खबर)
एनटीटीइ के माध्यम से दो कंपनिया टाटा टेक्निकल, टाटा सपोर्ट सर्विसेज का गठन भी हो गया. वर्ष 2019 के वेज रिवीजन समझौते के अनुसार इन कंपनियों में सबसे पहले टाटा स्टील के गैर तकनीकी निबंधतो का नियोजन होना चाहिए था पर टाटा स्टील मैनेजमेंट और वर्तमान यूनियन अध्यक्ष ने टाटा स्टील में होनेवाली एनएस-4 से 7 ग्रेड की नियुक्ति इन कंपनियों में करनी शुरू कर दी, जो वर्ष 2019 के वेज रिवीजन समझौते से बिलकुल अलग है. इन लोगों ने बताया कि टाटा स्टील ने पहले स्टील वेज को खत्म कर एनएस ग्रेड लाया और आज एनएस ग्रेड खत्म कर अलग-अलग पद नामो एफटीसी पर मात्र एक वर्ष के लिए नियुक्तिया कर रही है. (नीचे भी पढ़ें)
काम सबसे एक ही प्रकार का करवा रही ही पर वेतन का भुगतान अलग-अलग कर रही है. आइआइटी पास (तकनीकी) लोगो का नियुक्ति कर रही पर वेतन के नाम पर उनको गैर तकनीकी पदों पर कार्य कर रहे लोगो से भी कम वेतन दे रही है. एक साल के ट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप के नाम पर फूल प्रोडक्शन लिया जा रहा है. इस ज्ञापन को सौंपने वालों में संतोष कुमार ओझा, दिलीप कुमार, राजीव दास, रानी महतो, राकेश कुमार, बबिता, रंजीत कुमार, सुदामा, राजेश तांडी, बंटी, उमेश ठाकुर, संजीव शामिल है.


