जमशेदपुर : टाटा स्टील ने एक बार फिर से वीआरएस स्कीम सुनहरे भविष्य की योजना 3.0 लांच कर दिया है. वीआरएस के लिए कर्मचारियों के आवेदन आमंत्रित किये गये है, जिसके तहत कर्मचारियों की संख्या को कम की जायेगी. यह योजना 20 फरवरी से 20 मार्च तक प्रभावी होगी. इसके लिए वैसे कर्मचारी अपना आवेदन कर सकते है, जिन्होंने टाटा स्टील में कम से कम 10 साल की स्थायी नौकरी कर ली है और 40 साल की उम्र पार कर चुके है. पुराना सीरीज वाले कर्मचारियों को ज्यादा लाभ मिलेगा. इसके तहत कर्मचारियों के मासिक वेतनमान में 1000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी होगी. इसके अलावा भविष्य में कर्मचारी अपने बदले अपने बेटे या बेटी को भी नौकरी दे सकते है यानी वे जॉब फॉर जॉब (नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ) स्कीम का लाभ उठा सकते है. इसके अलावा कंपनी का क्वार्टर खाली करने पर 15 माह का एचआरए भी दिाय जायेगा जबकि 20 हजार रुपये का विशेष अनुदान भी दिया जायेगा. पुराने सीरीज के स्थायी कर्मचारी इसका लाभ लेते है तो अपने सेवा के दौरान अंतिम वेतन यानी बेसिक व डीए के बराबर मासिक वेतन उनको मिलता रहेगा. (नीचे भी पढ़ें)
उनको अपनी आवश्यकता और योग्यता के आधार पर विकल्प चुनने की स्वतंत्रता दी गयी है. वे लोग एक से अधिक नॉमिनी का नाम दे सकते है. नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ स्कीम दोनों एक साथ भी ले सकते है. नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ स्कीम के तहत अपने आश्रित को एनएस 4 या एनएस 7 में कर्मचारी बहाली करा सकते है. मासिक वेतन लेने का विकल्प भी मौजूद है. इसके तहत मासिक वेतन (प्रतिदान) में एक हजार रुपये की बढ़ोत्तरी होती रहेगी. कर्मचारियों और उनके परिजनों को नियम के तहत टीएमएच या इलाज की सुविधा मिलती रहेगी. सामान्य कर्मचारी की तरह ही यह लाभ मिलेगा. पीएफ, ग्रेच्यूटी, वार्षिक बोनस, लीव, फेयरवेल गिफ्ट समेत अन्य का लाभ मिलेगा. स्थायी कर्मचारी जो 40 से 55 साल तक के है, वे लोग इसका लाभ ले सकते है. (नीचे भी पढ़ें)
कम से कम मैट्रिक पास या 10 प्लस टू वाले कर्मचारी इसका लाभ हो सकता है. 20 मार्च 2023 तक आश्रित को 18 साल या 34 साल से कम होगा, उनको नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ स्कीम का लाभ दिया जायेगा. पहले से अधिक मेंटेनेंस भत्ता 13 हजार रुपये प्रतिमाह तय किया गया है. इस बार के ऑफर में कर्मचारी नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ स्कीम के तहत अपने बेटे, बेटी और दामाद के अलावा बहु को भी नौकरी दे सकते है. मासिक वेतन के अलावा हर साल 250 रुपये का तदर्थ राशषि के रुप में दी जायेगी, जो अवकाश ग्रहण की अवधि या चुने गये मासिक वेतन की अवधि तक प्राप्त होगी.




